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वेद का पढना-पढ़ाना, सुनना-सुनाना सभी आर्यो का परम धर्म
ब्यूरो/ अमर उजाला, बागपत
Updated Tue, 11 Oct 2016 04:38 PM IST
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दोघट। स्वामी विवेकानंद सरस्वती ने कहा कि वेद सब सत्य विद्याओं की पुस्तक है। वेद का पढना-पढ़ाना, सुनना-सुनाना सभी आर्यो का परम धर्म है।
उन्होने दाहा गांव में यज्ञशाला में चल रहे तीन दिवसीय ऋग्वेद पारायण यज्ञ में ब्रह्मा पद से बोलते हुए कहा कि वेद के रास्ते पर चलकर ही मानव का कल्याण हो सकता है। इसलिए मनुष्य को वेदानुसार ही कार्य करने चाहिए। इस अवसर पर आचार्य धनकुमार शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को समाज की नीतियों के अनुसार कार्य करने चाहिए।
समाज में फैली कुरीतियां समाज को दिगभ्रमित कर रही है। हमें इस तरफ ध्यान देना चाहिए। आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आत्मा और परमात्मा का मिलन जरूरी है। नरेश दत्त आर्य ने भजनों के माध्यम से ईश्वर की उपासना की। स्वामी यज्ञमुनि, श्याम मुनि ने भी विचार रखे। यज्ञमान विवेक व उदिता रहे।
संचालन चौगामा पुरोहित सत्यपाल आर्य ने किया। डॉ. चंद्रवीर राणा और सोमपाल राणा ने अगंतुकों का स्वागत किया और धन्यवाद किया। गुरूकुल प्रभात आश्रम भोला झाल टीकरी के ब्रह्मचारी रोहित, दिव्यांशु, सर्वेश, हर्षित ने वेदपाठ किया। इसमें मांगेराम आर्य, देवेंद्र आर्य, राजीव कुमार, मांगेराम राठी, जितेंद्र पंवार, गुरूदत्त, हरबीर सिंह, रमेश आर्य, राजेंद्र राणा, मास्टर रामकुमार, ब्रहमपाल राणा, उदयवीर, ब्रह्मचारी आर्य, राजपाल आदि रहे।
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उन्होने दाहा गांव में यज्ञशाला में चल रहे तीन दिवसीय ऋग्वेद पारायण यज्ञ में ब्रह्मा पद से बोलते हुए कहा कि वेद के रास्ते पर चलकर ही मानव का कल्याण हो सकता है। इसलिए मनुष्य को वेदानुसार ही कार्य करने चाहिए। इस अवसर पर आचार्य धनकुमार शास्त्री ने कहा कि मनुष्य को समाज की नीतियों के अनुसार कार्य करने चाहिए।
समाज में फैली कुरीतियां समाज को दिगभ्रमित कर रही है। हमें इस तरफ ध्यान देना चाहिए। आचार्य वीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि आत्मा और परमात्मा का मिलन जरूरी है। नरेश दत्त आर्य ने भजनों के माध्यम से ईश्वर की उपासना की। स्वामी यज्ञमुनि, श्याम मुनि ने भी विचार रखे। यज्ञमान विवेक व उदिता रहे।
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संचालन चौगामा पुरोहित सत्यपाल आर्य ने किया। डॉ. चंद्रवीर राणा और सोमपाल राणा ने अगंतुकों का स्वागत किया और धन्यवाद किया। गुरूकुल प्रभात आश्रम भोला झाल टीकरी के ब्रह्मचारी रोहित, दिव्यांशु, सर्वेश, हर्षित ने वेदपाठ किया। इसमें मांगेराम आर्य, देवेंद्र आर्य, राजीव कुमार, मांगेराम राठी, जितेंद्र पंवार, गुरूदत्त, हरबीर सिंह, रमेश आर्य, राजेंद्र राणा, मास्टर रामकुमार, ब्रहमपाल राणा, उदयवीर, ब्रह्मचारी आर्य, राजपाल आदि रहे।
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