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पिता के अनुशासन और प्रेरणा से आज बुलंदियों को छू रहीं कई प्रतिभाएं

Sat, 19 Jun 2021 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 19 Jun 2021 11:24 PM IST
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Talents reaching heights with the inspiration of father
बागपत/बड़ौत। हर सफलता के पीछे किसी न किसी शख्स का हाथ होता है। इनमें पिता का योगदान सबसे अहम है। पिता के अनुशासन में रहकर जिसने भी सलाह का अनुसरण किया उसकी मंजिल दूर नहीं रही। उसे मुकाम हासिल करने में कोई मुश्किल नहीं आई। ऐसे लोग दूसरों के लिए आदर्श बन गए। कुछ ऐसी ही दास्तान जनपद की कई प्रतिभाओं की है। वे पिता से प्रेरणा पाकर बुलंदियों को छू रहे हैं।
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बूढ़े कंधों पर आई गई जिम्मेदारी
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में कई परिवार बर्बाद हो गए। जिन बच्चों को चलना सिखाया उन्हीं को कंधा देना पड़ा। बेटे के जाने का गम बागपत के धर्मपाल और शकुंतला की आंखों से छलकता है। शिक्षामित्र सचिन का जिक्र आते ही माता-पिता की आवाज भारी हो जाती है। उनकी बूढ़ी और बेबस आंखों में बेटे को खोने का दर्द है। परिवार के पोषण के लिए पेंशन का सहारा है। पुत्र सचिन शर्मा की पत्नी नीतू, दो बेटी प्रेरणा व राधिका और बेटे अर्जुन व आर्यन की जिम्मेदारी बूढ़े कंधों पर आ गई है। सचिन का छोटा भाई अमित निजी कंपनी में कर्मचारी है।
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इनके लिए प्रेरणास्रोत हैं पिता
बीडीओ राहुल वर्मा का मानना है कि वह पिता रामविलास वर्मा की बदौलत इस मुकाम पर हैं। मूलरूप से मुरादाबाद निवासी राहुल वर्मा के पास बड़ौत व बिनौली ब्लॉक का चार्ज है। उनके पिता रामविलाम वर्मा सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। वह बताते हैं कि मुश्किल घड़ी में पिता ने हमेशा साथ दिया। जब भी परेशानी आती तो वे उनसे जरूर साझा करते हैं। जिससे समाधान निकल आता है।
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पिता से सीखी अनुशासन और ईमानदारी
जनता इंटर कॉलेज हिलवाड़ी में प्रवक्ता राजेश वर्मा हेवा निवासी हैं। पिता प्रकाश चंद किसान हैं। राजेश वर्मा का कहना है कि उन्होंने पिता से कठोर परिश्रम, अनुशासन, लगन, ईमानदारी और दायित्व की प्रेरणा ली। जिससे सफलता हासिल करने में काफी मदद मिली। उन्होंने बताया कि पिता ने बिना भेदभाव बेटा-बेटी को खूब पढ़ाया। मुश्किल घड़ी में हमेशा साथ दिया। यह उनकी सीख एवं आशीर्वाद का नतीजा है कि वह अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं।
पिता सच्चे मागदर्शक
मलकपुर गांव के अंतराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी नितिन तोमर का कहना है कि उनके पिता जितेंद्र तोमर ने हर कदम-कदम पर साथ दिया है। पिता ने कबड्डी खेलने के लिए प्रेरित किया। उनकी प्ररेणा में आज बुलंदियों हैं। पिता सच्चे मार्गदर्शक हैं। पिता के अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा से उन्हें मुकाम हासिल करने में मदद मिली है।
दृढ संकल्प पिता से सीखा
जनपद बागपत की एकमात्र महिला लेफ्टिनेंट साक्षी सिंह निवासी मलकपुर को पिता राकेश पर गर्व है। पिता राकेश सहारनपुर में यूपी पुलिस में हवलदार के पद पर हैं। साक्षी बताती हैं कि बचपन से ही पापा बहुत प्यार करते थे। शिक्षा के साथ उन्होंने संस्कार दिए और मुश्किल घड़ी में हौसला बनाए रखने की सीख दी। आज उन्हीं की प्रेरणा से इस मुकाम हैं।

हौसला पिता की सबसे बड़ी धरोहर
बड़ौत के शिवम त्रिपाठी के पिता राजीव लोचन नगर के पंचमुखी मंदिर में पुजारी थे। शिवम त्रिपाठी का कहना है कि वह फादर्स डे पर अपने पिता की फोटो व्हाट्स एप स्टेटस पर लगाते थे। इस बार भी ऐसा करेंगे परंतु विश नहीं कर पाएंगे। यह सोचकर आंखें नम हो जाती हैं। उनकी सीख के अनुसार हौसला बनाए रखकर उनका सपना साकार करुंगा।
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