{"_id":"63752a362a0d9c7e6f64084f","slug":"sudama-character-explained-the-importance-of-friendship-to-the-society-baraut-news-mrt6138093153","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण-सुदामा वृतांत सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रीकृष्ण-सुदामा वृतांत सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
विज्ञापन
बड़ौत। नगर के विवाह मंडप में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन कथा व्यास पंडित पवन आचार्य ने भक्तों को सुदामा चरित्र, उद्धव संवाद, विष्णु सहस्त्रनाम और गोतर्पण की कथा सुनाई।
कथा व्यास पवन आचार्य ने कहा कि जब उद्धव गोपियों को ज्ञान का संदेश देने जाते हैं, तो गोपियां कहती हैं कि हे उद्धव हमारे पास एक मन है। इसमें हमारा कृष्ण विराजमान है फिर इसमें ज्ञान कहां से समा सकता है। इसके बाद में गोपियों ने ‘ऊधो मन न भए दस बीस, एक हो सो गयो श्याम संग’ कहकर उद्धव को वापस भेज दिया। इसके बाद महाराज ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। कथा सुनाकर भक्त भाव विभोर हो गए।
इसके बाद में विष्णु सहस्त्रनाम की महिमा का सुंदर वर्णन किया। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिशाल पेश की। समाज में समानता का संदेश दिया। कहा कि गोपियों की कृष्ण के प्रति जो अनुरक्ति व भक्ति थी, वह निष्काम थी। इसलिए कृष्ण के मन में भी गोपियों के प्रति उतना ही अनुराग का भाव था। सुदामा गरीब कदापि नहीं थे। जिस प्रकार की दीन दशा का वर्णन मिलता है, वह मात्र उनका संतोष था। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मनमोहक झांकी के दर्शन किए और पुष्प वर्षा करके स्वागत किया। उन्होंने बताया गुरुवार सुबह सात बजे विशाल यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। पूर्णाहुति सुबह आठ बजे दी जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कथा व्यास पवन आचार्य ने कहा कि जब उद्धव गोपियों को ज्ञान का संदेश देने जाते हैं, तो गोपियां कहती हैं कि हे उद्धव हमारे पास एक मन है। इसमें हमारा कृष्ण विराजमान है फिर इसमें ज्ञान कहां से समा सकता है। इसके बाद में गोपियों ने ‘ऊधो मन न भए दस बीस, एक हो सो गयो श्याम संग’ कहकर उद्धव को वापस भेज दिया। इसके बाद महाराज ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। कथा सुनाकर भक्त भाव विभोर हो गए।
विज्ञापन
इसके बाद में विष्णु सहस्त्रनाम की महिमा का सुंदर वर्णन किया। कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिशाल पेश की। समाज में समानता का संदेश दिया। कहा कि गोपियों की कृष्ण के प्रति जो अनुरक्ति व भक्ति थी, वह निष्काम थी। इसलिए कृष्ण के मन में भी गोपियों के प्रति उतना ही अनुराग का भाव था। सुदामा गरीब कदापि नहीं थे। जिस प्रकार की दीन दशा का वर्णन मिलता है, वह मात्र उनका संतोष था। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मनमोहक झांकी के दर्शन किए और पुष्प वर्षा करके स्वागत किया। उन्होंने बताया गुरुवार सुबह सात बजे विशाल यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। पूर्णाहुति सुबह आठ बजे दी जाएगी।
विज्ञापन