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मस्जिद का बकाया नहीं देने पर कब्र की खोदाई रोकी
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छपरौली (बागपत)। गांव तिलवाड़ा में एक बुजुर्ग की मौत के बाद उसके परिजनों को कब्र खोदने से इसलिए रोक दिया गया, कि बुजुर्ग के परिवार ने सालों से मस्जिद का बकाया आठ हजार रुपये जमा नहीं किए थे। दो घंटे तक जद्दोजहद होती रही, बाद में बुजुर्ग के दामाद ने एक हजार रुपये जमा किए, इसके बाद बुजुर्ग के शव को कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जा सकता।
मामला दो दिन पुराना है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के बुजुर्ग हकीमू की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। कब्र की खोदाई के लिए मस्जिद से ही फावड़े वह अन्य औजार दिए जाते हैं। परिजन उन्हें लेने मस्जिद पहुंचे तो उन्हें पहले मस्जिद का बकाया जमा करने को कहा। गांव में मस्जिद के संचालन और अन्य खर्चों के लिए हकीमू को भी सौ रुपये महीना देने थे, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह कई सालों से यह रकम नहीं दे रहा था। हकीमू के बेटे साहिल ने बताया कि परिवार वालों ने आगे से नियमित खर्च का हिस्सा देने की बात कही। इसके बाद भी कब्र की खोदाई के लिए औजार नहीं दिए। मामला बढ़ता देखकर हकीमू के दामाद ने एक हजार रुपये मस्जिद में दिए। उसके बाद ही उनको कब्र की खोदाई के लिए औजार दिए गए और हकीमू का शव सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
मस्जिद के मोहतमिम मोहम्मद तासिम ने बताया कि मस्जिद में सौ रुपये प्रतिमाह देने पड़ते हैं और हकीमू के परिवार पर अभी तक करीब आठ हजार रुपये बकाया थे। उनको औजार लेने आने पर उन बकाया रुपयों के बारे में कहा गया था। उनके रिश्तेदार ने एक हजार रुपये दिए तो उनको औजार दे दिए गए थे।
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मामला दो दिन पुराना है, जो क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के बुजुर्ग हकीमू की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। कब्र की खोदाई के लिए मस्जिद से ही फावड़े वह अन्य औजार दिए जाते हैं। परिजन उन्हें लेने मस्जिद पहुंचे तो उन्हें पहले मस्जिद का बकाया जमा करने को कहा। गांव में मस्जिद के संचालन और अन्य खर्चों के लिए हकीमू को भी सौ रुपये महीना देने थे, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह कई सालों से यह रकम नहीं दे रहा था। हकीमू के बेटे साहिल ने बताया कि परिवार वालों ने आगे से नियमित खर्च का हिस्सा देने की बात कही। इसके बाद भी कब्र की खोदाई के लिए औजार नहीं दिए। मामला बढ़ता देखकर हकीमू के दामाद ने एक हजार रुपये मस्जिद में दिए। उसके बाद ही उनको कब्र की खोदाई के लिए औजार दिए गए और हकीमू का शव सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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मस्जिद के मोहतमिम मोहम्मद तासिम ने बताया कि मस्जिद में सौ रुपये प्रतिमाह देने पड़ते हैं और हकीमू के परिवार पर अभी तक करीब आठ हजार रुपये बकाया थे। उनको औजार लेने आने पर उन बकाया रुपयों के बारे में कहा गया था। उनके रिश्तेदार ने एक हजार रुपये दिए तो उनको औजार दे दिए गए थे।
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