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मिट्टी की जांच के बाद किसानों को दिए जाएंगे स्वास्थ्य कार्ड
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मिट्टी की जांच के बाद किसानों को दिए जाएंगे स्वास्थ्य कार्ड
बागपत। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिले के छह गांवों को रोल मॉडल के चयन किया गया है। योजना के तहत इन गांवों की भूमि की सेहत को सुधारा जाएगा। शत-प्रतिशत किसानों के खेतों से मिट्टी की जांच होगी। कृषकों को जागरूक करने के लिए कृषि मेले लगाए जाएंगे। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए है।
किसानों की भूमि की सेहत सुधारने के लिए कृषि विभाग कार्य कर रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत गांव हर ब्लॉक से फतेहपुर चक, जिवाना गुलियान, अब्दुलापुर मेवला, मुकंदपुर, नूरपुर मुजविदा, ब्राह्मण पुट्ठी का चयन किया गया है। यहां शत-प्रतिशत खेत की मिट्टी की जांच की जाएगी। मिट्टी की जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे। खेतों में कौन से पोषक तत्व नहीं है, इसकी जानकारी देंगे। किसानों को खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के तरीके बताएंगे। रासायनिक उर्वरकों से भूमि को हो रहे नुकसान को बताया जाएगा। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने सभी एडीओ कृषि, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष एवं सभी उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी को निर्देश दिए कि इन गांवों में शत-प्रतिशत मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण कराए जाएं। मिट्टी की जांच कर किसानों को पूरी जानकारी दी जाए। वहीं प्रदर्शनी एवं किसान मेले लगाए जाएं, जहां किसानों को विभिन्न जानकारियां दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इन गांवों को रोल मॉडल बनाकर अन्य गांव तक इसकी जानकारी दी जाएगी।
धान में मिला सड़न और गलन का रोग
बागपत। एडीओ कृषि महेश कुमार खोखर ने बताया कि ककोर कलां, सिलाना, कुरड़ी, टांडा और बोढ़ा में धान फसल का निरीक्षण किया गया। कुछ किसानों की फसल की वानस्पतिक अवस्था अच्छी थी। कुछ जगह सड़न व गलन का रोग मिला। धान की फसल में जगह-जगह सड़न व गलन लगी हुई थी। इसके लिए किसानों को बताया कि वह ट्राइकोडरमा एक किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद में मिलाकर शाम के समय डाल दें। यदि रोग का प्रकोप ज्यादा है तो कार्बन्डाजिम और मैनकोजेब की 200 ग्राम मात्रा प्रति बीघा के हिसाब से डाले। जिस खेत में सड़न व गलन है, उसका पानी निकाल दें और सूखने के बाद ही पानी दें। विकास कुमार, ओंकार, अशोक, अरविन्द, जयवीर किसान उपस्थित रहे।
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बागपत। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जिले के छह गांवों को रोल मॉडल के चयन किया गया है। योजना के तहत इन गांवों की भूमि की सेहत को सुधारा जाएगा। शत-प्रतिशत किसानों के खेतों से मिट्टी की जांच होगी। कृषकों को जागरूक करने के लिए कृषि मेले लगाए जाएंगे। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए है।
किसानों की भूमि की सेहत सुधारने के लिए कृषि विभाग कार्य कर रहा है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत गांव हर ब्लॉक से फतेहपुर चक, जिवाना गुलियान, अब्दुलापुर मेवला, मुकंदपुर, नूरपुर मुजविदा, ब्राह्मण पुट्ठी का चयन किया गया है। यहां शत-प्रतिशत खेत की मिट्टी की जांच की जाएगी। मिट्टी की जांच के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे। खेतों में कौन से पोषक तत्व नहीं है, इसकी जानकारी देंगे। किसानों को खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के तरीके बताएंगे। रासायनिक उर्वरकों से भूमि को हो रहे नुकसान को बताया जाएगा। उप कृषि निदेशक प्रशांत कुमार ने सभी एडीओ कृषि, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष एवं सभी उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी को निर्देश दिए कि इन गांवों में शत-प्रतिशत मृदा स्वास्थ्य कार्ड का वितरण कराए जाएं। मिट्टी की जांच कर किसानों को पूरी जानकारी दी जाए। वहीं प्रदर्शनी एवं किसान मेले लगाए जाएं, जहां किसानों को विभिन्न जानकारियां दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इन गांवों को रोल मॉडल बनाकर अन्य गांव तक इसकी जानकारी दी जाएगी।
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धान में मिला सड़न और गलन का रोग
बागपत। एडीओ कृषि महेश कुमार खोखर ने बताया कि ककोर कलां, सिलाना, कुरड़ी, टांडा और बोढ़ा में धान फसल का निरीक्षण किया गया। कुछ किसानों की फसल की वानस्पतिक अवस्था अच्छी थी। कुछ जगह सड़न व गलन का रोग मिला। धान की फसल में जगह-जगह सड़न व गलन लगी हुई थी। इसके लिए किसानों को बताया कि वह ट्राइकोडरमा एक किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद में मिलाकर शाम के समय डाल दें। यदि रोग का प्रकोप ज्यादा है तो कार्बन्डाजिम और मैनकोजेब की 200 ग्राम मात्रा प्रति बीघा के हिसाब से डाले। जिस खेत में सड़न व गलन है, उसका पानी निकाल दें और सूखने के बाद ही पानी दें। विकास कुमार, ओंकार, अशोक, अरविन्द, जयवीर किसान उपस्थित रहे।
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