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छह तरह के पापों से बचना चाहिए : महेशानंद
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चांदीनगर (बागपत)। खट्टा प्रह्लादपुर गांव के चंदनवाला मंदिर में चल रही शिव महा पुराण कथा के चौथे दिन बुधवार को प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालुओं मंत्रमुग्ध हो गए। बारिश होने के बाद भी सैकड़ों लोगों ने पहुंचकर धर्म लाभ कमाया।
कथा सुनाते हुए महा मंडलेश्वर स्वामी महेशानंद ने कहा जीवन में कुछ ऐसे पाप हो जाते हैं, जिससे हम जीवन भर दुखी रहते हैं। हमारे जीवन में छह ऐसे पाप हैं, जिनसे बचना होगा। पहला पाप गुरुदेव को मनुष्य मानना, दूसरा पाप भगवान की मूर्ति (विग्रह) को पत्थर समझना, तीसरा चरणामृत को पानी समझना, चौथा गुरू से प्राप्त मंत्र को केवल अक्षर मानना, पांचवां भगवान को समर्पित महाप्रसाद को केवल अन्न भोजन समझना और छठा किसी संत से उनकी जाति के विषय में पूछना।
उन्होंने कहा कि इन छह प्रकार के पापों से मनुष्य को सदैव बचना चाहिए। शास्त्रों में और पुराणों में कई प्रकार के पापों का वर्णन मिलता है और उनके स्थिति को बताया, लेकिन यह छह प्रकार के पाप तो भगवान के नाम जपने से भी दूर नहीं होते हैं। इस दौरान नारायण गिरि, सतीश शर्मा, बिल्लू, वीरपाल सैनी, कपिल, रजनी, सुनीता, दीपा, धर्मबीर, प्रवेश सैनी, साक्षी, कविता, मनीषा, सुनीता, देवकी, तनु, अन्नू, राजबाला आदि रहे।
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कथा सुनाते हुए महा मंडलेश्वर स्वामी महेशानंद ने कहा जीवन में कुछ ऐसे पाप हो जाते हैं, जिससे हम जीवन भर दुखी रहते हैं। हमारे जीवन में छह ऐसे पाप हैं, जिनसे बचना होगा। पहला पाप गुरुदेव को मनुष्य मानना, दूसरा पाप भगवान की मूर्ति (विग्रह) को पत्थर समझना, तीसरा चरणामृत को पानी समझना, चौथा गुरू से प्राप्त मंत्र को केवल अक्षर मानना, पांचवां भगवान को समर्पित महाप्रसाद को केवल अन्न भोजन समझना और छठा किसी संत से उनकी जाति के विषय में पूछना।
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उन्होंने कहा कि इन छह प्रकार के पापों से मनुष्य को सदैव बचना चाहिए। शास्त्रों में और पुराणों में कई प्रकार के पापों का वर्णन मिलता है और उनके स्थिति को बताया, लेकिन यह छह प्रकार के पाप तो भगवान के नाम जपने से भी दूर नहीं होते हैं। इस दौरान नारायण गिरि, सतीश शर्मा, बिल्लू, वीरपाल सैनी, कपिल, रजनी, सुनीता, दीपा, धर्मबीर, प्रवेश सैनी, साक्षी, कविता, मनीषा, सुनीता, देवकी, तनु, अन्नू, राजबाला आदि रहे।
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