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Baghpat News: धूमधाम से शुरू हुआ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान
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फोटो संख्या 6
बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पर सोमवार को श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महामण्डल विधान के पहले दिन सबसे पहले समाज के लोग सौधर्म इंद्र और इंद्राणी को लेने उनके घर गए। वहां से बैंड-बाजे के साथ सौधर्म इंद्र परिवार को लेकर पारसनाथ मंदिर पहुंचे। इसके बाद इंद्र और सभी इंद्राणियों की घट यात्रा श्री पारसनाथ मन्दिर से चलकर अतिथि भवन पहुंची। वहां से जल लेकर गांधी रोड होते हुए सभी इंद्र-इंद्राणी पारसनाथ मंदिर में पहुंचे, जहां श्री जी को उनकी मूल वैदिक से लेकर पाण्डुशिला पर विराजमान किया गया। इसके बाद नवहन से पहले डॉ़ पवन जैन ने सर्वप्रथम ध्वजारोहण किया। पंडित सुनील शास्त्री ने पूजा कराई और आनंद जैन ने दीप प्रज्ज्वलन किया। मण्डप शुद्धि के बाद पंडित सुनील शास्त्री के मार्गदर्शन में श्री जी का अभिषेक किया गया। सबसे पहले नई पांडुशीला पर उदित जैन ने सौधर्म इंद्र संजय जैन और इसके बाद कुबेर इंद्र अतुल जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन और अन्य इन्द्रों ने श्री जी का अभिषेक किया। इसके बाद शांति धारा की गई। मांडले पर कलश स्थापना जिनवाणी स्थापना और अन्य क्रियाएं कराई गईं। इसके बाद पूजन क्रियाएं शुरू हुईं, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सतेंद्र जैन, बनरेश चंद जैन, अदिश जैन, अनिल जैन, प्रमोद जैन, राजीव जैन, अमन जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन का सहयोग रहा।
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बड़ौत। श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पर सोमवार को श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
महामण्डल विधान के पहले दिन सबसे पहले समाज के लोग सौधर्म इंद्र और इंद्राणी को लेने उनके घर गए। वहां से बैंड-बाजे के साथ सौधर्म इंद्र परिवार को लेकर पारसनाथ मंदिर पहुंचे। इसके बाद इंद्र और सभी इंद्राणियों की घट यात्रा श्री पारसनाथ मन्दिर से चलकर अतिथि भवन पहुंची। वहां से जल लेकर गांधी रोड होते हुए सभी इंद्र-इंद्राणी पारसनाथ मंदिर में पहुंचे, जहां श्री जी को उनकी मूल वैदिक से लेकर पाण्डुशिला पर विराजमान किया गया। इसके बाद नवहन से पहले डॉ़ पवन जैन ने सर्वप्रथम ध्वजारोहण किया। पंडित सुनील शास्त्री ने पूजा कराई और आनंद जैन ने दीप प्रज्ज्वलन किया। मण्डप शुद्धि के बाद पंडित सुनील शास्त्री के मार्गदर्शन में श्री जी का अभिषेक किया गया। सबसे पहले नई पांडुशीला पर उदित जैन ने सौधर्म इंद्र संजय जैन और इसके बाद कुबेर इंद्र अतुल जैन, यज्ञ नायक जयपाल जैन और अन्य इन्द्रों ने श्री जी का अभिषेक किया। इसके बाद शांति धारा की गई। मांडले पर कलश स्थापना जिनवाणी स्थापना और अन्य क्रियाएं कराई गईं। इसके बाद पूजन क्रियाएं शुरू हुईं, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सतेंद्र जैन, बनरेश चंद जैन, अदिश जैन, अनिल जैन, प्रमोद जैन, राजीव जैन, अमन जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन का सहयोग रहा।