Baghpat News: माता-पिता के लिए गर्व के पल, जूता कारीगर की बेटी बनेगी दारोगा, किसान की बेटी भी पहनेगी खाकी
मौका मिले तो बेटियां भी समाज में बेहतर मुकाम हासिल कर सकती हैं। विपरीत परिस्थियों में अपनी मेहनत के दम पर बागपत की बेटियों ने भी अपने माता पिता के साथ समाज में नाम रोशन किया है। यहां जूता कारीगर की बेटी दरोगा बनी है तो वहीं कर्ज लेकर पढ़ाई पूरी कराने वाली बेटी को खाकी में देखकर किसान पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
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विपरीत परिस्थितियों में मेहनत के दम पर बेटियां मुकाम हासिल कर सकती हैं। इसका बड़ा उदाहरण एसआई के लिए चयनित होने वाली बागपत की बेटियां हैं। यहां जूता कारीगर की बेटी दारोगा बनेगी, कर्ज लेकर बेटी को पढ़ायने वाले किसान की बेटी भी खाकी पहनेगी। एसआई के लिए चयनित सभी बेटियां प्रशिक्षण के लिए गईं हैं।
जूता कारीगर की बेटी ने हासिल किया मुकाम
शहर के गायत्रीपुरम के रहने वाले राजेंद्र काफी समय से राष्ट्र वंदना चौक पर सड़क किनारे बैठकर जूतों की मरम्मत करते हैं। उनकी बेटी शिवानी ने खाकी वर्दी पहनने का सपना देखा। इसके लिए खूब मेहनत की। शिवानी ने वर्ष 2021 में जब एसआई की भर्ती के लिए आवेदन किया, तभी पांच दिन पहले उसकी उम्र 21 साल की हुई थी। उसका चयन हुआ और वह रविवार को प्रशिक्षण के लिए गई है।
शिवानी कहती है कि मेहनत और शिक्षा के दम पर हर बाधा को पार किया जा सकता है। उन्होंने अपनी सफलता के लिए शिक्षक अमित विकल और पिता राजेंद्र की मेहनत को अहम बताया। शिवानी ने नियुक्ति पत्र भी शिक्षक अमित विकल के हाथों से लिया और उनको मिठाई खिलाई। वह बताती है कि पिता राजेंद्र ने भी उसकी पढ़ाई के लिए खूब संघर्ष किया।
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झुंडपुर के किसान की बेटी पहनेगी खाकी
झुंडपुर के रहने वाले किसान रहपाल के पास केवल इतनी जमीन है, जिससे परिवार का गुजारा हो सके। इसके बाद भी तीन बेटियों और एक बेटे की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं रहने दी। उनकी मंझली बेटी रचना भी पिता का संघर्ष देखकर कुछ करने का जज्बा लेकर पढ़ाई करती रही। उसने खाकी पहनने का सपना देखा और एसआई के लिए चयन हो गया। वह शनिवार को प्रशिक्षण के लिए गई है।
रचना झुंडपुर गांव से पहली एसआई है। उसका कहना है कि वह जिस मेहनत के साथ पढ़ी है, उसी तरह मेहनत और ईमानदारी के साथ नौकरी कर लोगों की सुरक्षा करेगी। उसने अपनी कामयाबी का श्रेय मां संगीता, पिता रहपाल के साथ ही बहनों व भाई को दिया है।
लक्ष्य बनाकर की मेहनत तो मिली सफलता
बावली गांव के जयवीर सिंह की बेटी प्राची तोमर ने यह साबित कर दिया कि लगन व मेहनत के बूते किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है। मध्यम वर्गीय परिवार की प्राची शुरू से ही यूपी पुलिस में एसआई बनने की सपने संजोए थी। परिवार की हालत सामान्य थी, जिसको देखते हुए प्राची ने आठ से दस घंटे कड़ी मेहनत की और कामयाबी हासिल कर परिजनों का नाम रोशन किया। बेटी का एसआई के लिए चयन होने पर हर कोई उत्साहित है।
पिता ने कर्ज लेकर पढ़ाया तो बेटी ने मान बढ़ाया
सिरसलगढ़ के रहने वाले यतेंद्र सिंह की बेटी निशिका उज्ज्वल ने एसआई के लिए चयनित होकर साबित कर दिया कि लक्ष्य तय करके मेहनत की जाए तो सफलता जरूर मिलती है। निशिका दस से बारह घंटे पढ़ाई करती थी।
निशिका के पिता यतेन्द्र सिंह ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद बेटी को कभी किसी प्रकार की कमी होने नहीं दी। पिता की इच्छा थी कि बेटी अपने पैरों पर खड़ी हो। पिता यतेन्द्र सिंह कहते हैं कि उनपर कई बार कर्ज भी हुआ। इसके बावजूद बेटी की पढ़ाई जारी रखी। अब बेटी ने एसआई के लिए चयन कराकर पिता का मान बढ़ाया है।