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Baghpat News: दावेदारों को झटका, प्रधानों का राज कायम रहेगा

Fri, 09 Dec 2022 10:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 09 Dec 2022 10:54 PM IST
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Shock to the claimants, the rule of princes will continue
बागपत। नगर पालिका का सीमा विस्तार निरस्त होने से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदारों को बड़ा झटका लगा है। वहीं जिन तीन गांवों सिसाना, नयागांव हमीदाबाद, पाली को नगर पालिका में शामिल किया गया था, उनमें प्रधानों का राज अभी कायम रहेगा। इसको लेकर अधिकारी भी शासन के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं और वह शासन के निर्देश मिलने के बाद ही आगे कोई कार्रवाई शुरू करेंगे।
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बागपत में वर्ष 1982 में नगर पालिका बनाई गई थी। जिसके बाद शहर का दायरा लगातार बढ़ने के बावजूद इसका विस्तार नहीं किया। जिला मुख्यालय भी सिसाना व निवाड़ा गांवों के बीच में बनने के बावजूद नगर पालिका की सीमा नहीं बढ़ाई गई। इसको देखते हुए ही बागपत नगर पालिका के सीमा विस्तार की प्रक्रिया जून 2022 में शुरू की गई थी और इसकी प्राथमिक अधिसूचना 26 अगस्त 2022 को जारी हुई थी तो अंतिम अधिसूचना 21 सितंबर 2022 को जारी हुई।
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सीमा विस्तार में सिसाना, पाली, नयागांव हमीदाबाद की 2202 हेक्टेयर जमीन के 4116 गाटा नंबरों को शामिल किया। जिसके बाद बागपत नगर पालिका के राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए और चुनाव लड़ने के लिए दावेदारों की लाइन लग गई। सबसे ज्यादा दावेदार भाजपा से सामने आए, लेकिन अब उनको सीमा विस्तार निरस्त होने से बड़ा झटका लगा है।
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तीनों गांवों में प्रधान कार्य करते रहेंगे
सिसाना, नयागांव हमीदाबाद, पाली गांव में वर्ष 2021 में पंचायत चुनाव होने पर प्रधान बने थे। मगर सीमा विस्तार में इन तीन गांवों को नगर पालिका में शामिल करते ही इन तीनों गांवों के प्रधानों को झटका लगा था। प्रधान खुद भी हाईकोर्ट गए थे, लेकिन उनको राहत नहीं मिल सकी। अब सीमा विस्तार निरस्त होने पर फिलहाल गांवों में प्रधान कार्य करते रहेंगे और यह मामला सुप्रीम कोर्ट में जाता है तो वहां के निर्णय के आधार प्रधानों के कार्यकाल का फैसला होगा। वहीं कोर्ट के फैसले पर प्रधानों ने खुशी जताई।
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शासन के निर्देशों के अनुसार होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अधिकारियों को शासन के निर्देशों का इंतजार है। एडीएम प्रतिपाल चौहान का कहना है कि शासन से जिस तरह के निर्देश मिलेंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शासन से निर्देश मिलने के बाद ही इस बारे में ज्यादा कुछ कहा जा सकता है।

विशेषज्ञ राय--
अगर हाईकोर्ट के निर्णय को लेकर सरकार सुप्रीम कोर्ट में जाती है तो वहां से सीमा विस्तार की प्रक्रिया नए सिरे से कराने के निर्देश मिल सकते है। जिसके बाद दोबारा प्रक्रिया शुरू करके सीमा विस्तार किया जा सकता है। इसके अलावा हाईकोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे होता है तो उस स्थिति में भी चुनाव को सीमा विस्तार के आधार पर कराया जा सकता है। - विश्रुत जैन, सुप्रीम कोर्ट के वकील
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