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Baghpat News: केसर रस्म संपन्न, दीक्षार्थी के लगे जयकारे

Mon, 23 Jan 2023 05:04 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Updated Mon, 23 Jan 2023 05:04 PM IST
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Saffron ceremony completed, initiation started cheering
बड़ौत। दीक्षा लेने के दौरान दीक्षार्थी संभव जैन द्वारा पहने जाने वाले साधु वेश पर केसर से मांगलिक चिह्न को अंकित कर केसर रस्म का रविवार को आयोजन किया। कार्यक्रम जैन स्थानक मंडी में तपस्वी धन्ना मुनि महाराज के सानिध्य में किया। श्रद्धालुओं ने केसर की वर्षा के मध्य दीक्षार्थी के जयकार लगाए।
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केसर रस्म के दौरान आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए तपस्वी धन्ना मुनि महाराज ने कहा कि दीक्षार्थी के आगामी भविष्य गति जीवन की अनुमोदना के कार्यक्रमों में शामिल होकर आम जनसाधारण अपने श्रद्धा एवं आस्था के भाव प्रकट करते हैं। इसका धार्मिक जगत में भी अत्यंत महत्व है। साध्वी विभावना महाराज ने कहा कि यह कार्य अत्यंत दुष्कर श्रेणी का है, जो केवल महामानव ही कर सकते हैं। केसर रस्म का सहयोग संयोजन मोनिका जैन द्वारा उनकी सहयोगी पारुल जैन, अनुराधा जैन इत्यादि के द्वारा किया। श्रद्धालुओं ने अपने वस्त्रों पर दीक्षार्थी बंधु के हाथों से केसर लगवा लगाया। दीक्षार्थी की वीर माता दीपा जैन, पिता रोहित जैन ने अपने परिवार सहित केसर के चिन्ह श्वेत वस्त्रों पर अंकित किए। मौके पर हरीश चंद्र जैन, राहुल जैन, शिखर चंद जैन, संजय जैन, मनोज जैन, अनुराग जैन, डॉ. अमित राय जैन, मोनिका जैन, पूनम जैन, राखी जैन, सुभाष चंद्र जैन इत्यादि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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केसरिया रंग है तेजस्विता का प्रतीक
दीक्षा महोत्सव के मुख्य संयोजक डॉ. अमित राय जैन ने कहा कि केसरिया रंग वीरता और तेजस्विता का प्रतीक है। जैन धर्म में दीक्षा लेने वाला कोई भी व्यक्ति अत्यंत साहसिक प्रवृत्ति का होना चाहिए, तभी वह दीक्षा लेने के योग्य होता है। इसीलिए दीक्षित होते वक्त पहने जाने वाले साधु की वेशभूषा के श्वेत वस्त्रों पर केसर से मंगल चिह्न बनाए जाते हैं। केसर की रस्म में जिन बर्तनों का उपयोग किया गया, वह सभी शुद्ध चांदी के बने हुए हैं। इनकी खासियत ये है कि यह सैकड़ों वर्ष प्राचीन हैं और इनका कई जैन साधु संतों की दीक्षा के कार्यक्रम के दौरान प्रयोग किया गया है। केसर छापने के लिए जिन लकड़ी के थप्पों का उपयोग किया है वह करीब 100 वर्ष प्राचीन है। उनमें एक विशेष थप्पा वह भी है जिनसे गुरुदेव श्री सुदर्शन लाल जी महाराज की दीक्षा के वस्त्र केसर से रंजीत किए थे।
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