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सड़कें फिर सुनसान, स्क्रीनिंग कैंप में छलकी पीड़ा
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बागपत के स्यादवाद कालेज में मजदूरों से जानकारी लेते कानूनगो राजकुमार
- फोटो : BAGHPAT
बागपत। केंद्र सरकार की सख्ती का असर दिखने लगा है। जिले की सीमाओं पर चेकिंग बढ़ी तो पैदल चलने वालों की संख्या भी इक्का-दुक्का रह गई है। स्क्रीनिंग कैंप ठिकाने बन गए हैं। अधिकतर कैंपों में आसपास के जिलों के लोग हैं। सबकी अपनी पीड़ा है। थकान और दर्द के बाद भी उनके दिलों में घर पहुंचने की चाह दिख रही है।
जयपुर राजस्थान से आने वाले बागपत, मेरठ और शामली के लोगों की आंखों में उनके सफर का दर्द छलक रहा है। रोजगार छिन गया है। सवाल घर चलाने का है। तीन-तीन दिन तक पैदल चलने के बाद लोग पहुंचे रहे है। जयपुर में फैक्ट्री में नौकरी करने वाले बागपत के पुराना कस्बे के सलीम का कहना है कि नौकरी छूट गई है। वह तीन दिन पहले जयपुर से अपने घर के लिए रवाना हुआ था। कभी पैदल चला, तो कभी किसी गाड़ी में बैठकर मुश्किल से घर पहुंचा है। राजस्थान से पहुंचे शामली के मोहम्मद फारूख कहना है कि वह 20 मार्च को राजस्थान गया था। वह वहां फेरी का काम करता है। लॉकडाउन होने के बाद काम बंद हो गया। वह चार दिन पहले राजस्थान से चला था। शामली के मोहम्मद कैफ का कहना है कि वह बर्तन की फैक्ट्री में काम करता है। तीन दिन से लगातार पैदल चल रहा है। दिल्ली रोड पर बनाए गए स्क्रीनिंग कैंप में 35 लोग रुके हुए हैं, इनमें अधिकतर आसपास के जिलो से हैं। छपरौली का कैंप खाली पड़ा है। बड़ौत और बालैनी में लोग ठहरे हुए है।
स्क्रीनिंग कैंप का नाम प्रवासियों की संख्या
स्यादवाद इंस्टीट्यूट 33
श्रीकृष्णा कालेज बालैनी 5
जैन धर्मशाला बड़ौत 45
नगर पंचायत छपरौली 45
पटवारी कालेज खेकड़ा 10
विनायक कालेज 15
नोट- आंकड़े 24 घंटे के है।
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जयपुर राजस्थान से आने वाले बागपत, मेरठ और शामली के लोगों की आंखों में उनके सफर का दर्द छलक रहा है। रोजगार छिन गया है। सवाल घर चलाने का है। तीन-तीन दिन तक पैदल चलने के बाद लोग पहुंचे रहे है। जयपुर में फैक्ट्री में नौकरी करने वाले बागपत के पुराना कस्बे के सलीम का कहना है कि नौकरी छूट गई है। वह तीन दिन पहले जयपुर से अपने घर के लिए रवाना हुआ था। कभी पैदल चला, तो कभी किसी गाड़ी में बैठकर मुश्किल से घर पहुंचा है। राजस्थान से पहुंचे शामली के मोहम्मद फारूख कहना है कि वह 20 मार्च को राजस्थान गया था। वह वहां फेरी का काम करता है। लॉकडाउन होने के बाद काम बंद हो गया। वह चार दिन पहले राजस्थान से चला था। शामली के मोहम्मद कैफ का कहना है कि वह बर्तन की फैक्ट्री में काम करता है। तीन दिन से लगातार पैदल चल रहा है। दिल्ली रोड पर बनाए गए स्क्रीनिंग कैंप में 35 लोग रुके हुए हैं, इनमें अधिकतर आसपास के जिलो से हैं। छपरौली का कैंप खाली पड़ा है। बड़ौत और बालैनी में लोग ठहरे हुए है।
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स्क्रीनिंग कैंप का नाम प्रवासियों की संख्या
स्यादवाद इंस्टीट्यूट 33
श्रीकृष्णा कालेज बालैनी 5
जैन धर्मशाला बड़ौत 45
नगर पंचायत छपरौली 45
पटवारी कालेज खेकड़ा 10
विनायक कालेज 15
नोट- आंकड़े 24 घंटे के है।