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Baghpat News: गन्ने की फसल में फैला रेड रोट रोग, किसानों की चिंता बढ़ी
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-चौगामा क्षेत्र के अधिकांश गांव में गन्ने की प्रजाति कोजा 0238 में मिला रोग
-रोग से वजन कम होने के कारण पैदावार पर असर पड़ेगा
फोटो 9 की सीरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। गन्ने की फसल में रेड रोट रोग फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। चौगामा क्षेत्र में खेतों में खड़ी गन्ने की फसल में सबसे ज्यादा रेड रोट रोग पाया गया है। इससे किसानों को गन्ने का वजन कम होने से पैदावार प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। वहीं किसान बचाव के तरीके भी अपना रहे हैं।
पलड़ा गांव के किसान संदीप, मुलसम गांव में किसान महेश, खूंटी गांव में किसान बलविंदर, पलड़ी गांव किसान अनुज के खेतों में गन्ने की प्रजाति कोजा 0238 में रेड रोट पाया गया। इसे आम भाषा में गन्ने में लगने वाला लाल सड़न काना रोग कहा जाता है। इससे गन्ने का वजन कम रहता है और उससे पैदावार पर असर पड़ता है। किनौनी चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक मनीष दहिया ने बताया कि मुलसम, पलड़ा, पलड़ी, नंगला कनवाड़ा, मिलाना, झुंडपुर समेत कई गांवों की फसल में बीमारी मिली है। अब गन्ने की असोजी प्रजाति की बुवाई का समय चल रहा है। किसान भाई सीओएलके 14201 व 0118 अन्य वैरायटी अधिकांश क्षेत्र में लगाएं।
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फसल चक्र अपनाएं किसान
किनौनी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक जयवीर सिंह बताते हैं कि बार-बार एक खेत में गन्ना उगाने से इस रोग का कारक बढ़ता है। इसके अलावा गन्ने की बुवाई से पहले लाल सिरे वाले बीज के टुकड़ों को निकाल देना चाहिए। गन्ने की बुवाई से पहले एगलाल या एरीटान छह प्रतिशत, पारायुक्त रसायन 0.25 प्रतिशत घोल में 5 मिनट तक उपचारित करें। समय-समय पर रोग ग्रसित पौधों की जड़ सहित उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए। उस जगह पर 10 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर ढक देना चाहिए। पत्तियों पर मध्य सिरा के संक्रमण को कॉपर ऑक्सिक्लोराइड के 0.25 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने से कम किया जा सकता है।
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किसानों को होगा आर्थिक नुकसान
गन्ने में रेड रोट रोग पाए जाने से किसान परेशान हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। अब गन्ने की फसल तैयार हो गई है। जब तक मिल चालू होगी तब तक इस रोग से ग्रसित गन्ना पूरी तरह से सूख जाएगा। संजीव देशवाल, झुंडपुर
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किनारे से सूखने लगती हैं पत्तियां
रोग मुख्य रूप से बीज से फैलता है। इससे ग्रसित पौधे में पौधे की पत्तियां किनारे से सूखना शुरू कर देती हैं। जिसके बीच की पट्टी के मध्य सिरे पर लाल भूरे रंग के निशान पाए जाते हैं और मध्य सिरे पर रुद्राक्ष की माला बन जाती है। रोगी गन्ने को बीच से लम्बाई में चीरकर कर देखा जाए तो अंदर के उतको का रंग भूरा या गहरा लाल दिखाई देता है। विकास सोलंकी, सहायक गन्ना अधिकारी
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-रोग से वजन कम होने के कारण पैदावार पर असर पड़ेगा
फोटो 9 की सीरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
दोघट। गन्ने की फसल में रेड रोट रोग फैलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। चौगामा क्षेत्र में खेतों में खड़ी गन्ने की फसल में सबसे ज्यादा रेड रोट रोग पाया गया है। इससे किसानों को गन्ने का वजन कम होने से पैदावार प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। वहीं किसान बचाव के तरीके भी अपना रहे हैं।
पलड़ा गांव के किसान संदीप, मुलसम गांव में किसान महेश, खूंटी गांव में किसान बलविंदर, पलड़ी गांव किसान अनुज के खेतों में गन्ने की प्रजाति कोजा 0238 में रेड रोट पाया गया। इसे आम भाषा में गन्ने में लगने वाला लाल सड़न काना रोग कहा जाता है। इससे गन्ने का वजन कम रहता है और उससे पैदावार पर असर पड़ता है। किनौनी चीनी मिल के गन्ना प्रबंधक मनीष दहिया ने बताया कि मुलसम, पलड़ा, पलड़ी, नंगला कनवाड़ा, मिलाना, झुंडपुर समेत कई गांवों की फसल में बीमारी मिली है। अब गन्ने की असोजी प्रजाति की बुवाई का समय चल रहा है। किसान भाई सीओएलके 14201 व 0118 अन्य वैरायटी अधिकांश क्षेत्र में लगाएं।
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फसल चक्र अपनाएं किसान
किनौनी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक जयवीर सिंह बताते हैं कि बार-बार एक खेत में गन्ना उगाने से इस रोग का कारक बढ़ता है। इसके अलावा गन्ने की बुवाई से पहले लाल सिरे वाले बीज के टुकड़ों को निकाल देना चाहिए। गन्ने की बुवाई से पहले एगलाल या एरीटान छह प्रतिशत, पारायुक्त रसायन 0.25 प्रतिशत घोल में 5 मिनट तक उपचारित करें। समय-समय पर रोग ग्रसित पौधों की जड़ सहित उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए। उस जगह पर 10 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर डालकर ढक देना चाहिए। पत्तियों पर मध्य सिरा के संक्रमण को कॉपर ऑक्सिक्लोराइड के 0.25 प्रतिशत घोल का छिड़काव करने से कम किया जा सकता है।
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किसानों को होगा आर्थिक नुकसान
गन्ने में रेड रोट रोग पाए जाने से किसान परेशान हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। अब गन्ने की फसल तैयार हो गई है। जब तक मिल चालू होगी तब तक इस रोग से ग्रसित गन्ना पूरी तरह से सूख जाएगा। संजीव देशवाल, झुंडपुर
किनारे से सूखने लगती हैं पत्तियां
रोग मुख्य रूप से बीज से फैलता है। इससे ग्रसित पौधे में पौधे की पत्तियां किनारे से सूखना शुरू कर देती हैं। जिसके बीच की पट्टी के मध्य सिरे पर लाल भूरे रंग के निशान पाए जाते हैं और मध्य सिरे पर रुद्राक्ष की माला बन जाती है। रोगी गन्ने को बीच से लम्बाई में चीरकर कर देखा जाए तो अंदर के उतको का रंग भूरा या गहरा लाल दिखाई देता है। विकास सोलंकी, सहायक गन्ना अधिकारी