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36 घंटे बाद भी राशन की जांच पूरी नहीं, संदेह के घेरे में विभाग

Mon, 05 Jul 2021 10:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 05 Jul 2021 10:18 PM IST
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Ration investigation not complete even after 36 hours, department under suspicion
बड़ौत। दो सक्षम अधिकारियों द्वारा पकड़े गए राशन के 158 क्विंटल गेहूं और चावल की 36 घंटे बाद भी आपूर्ति विभाग की टीम जांच पूरी नहीं कर पाई है। यह हाल तब है जबकि मौके से हिरासत में लिए गए लोगों ने गेहूं मालिक का नाम रविवार को ही सार्वजनिक कर दिया था। अब जहां आपूर्ति विभाग द्वारा की जा रही जांच पर उंगली उठ रही है वहीं राशन माफिया को बचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। साथ ही विभाग के आला अधिकारी अपने जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने का काम कर रहे हैं।
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बता दें कि रविवार शाम बिनौली स्थित क्षेत्रीय विपणन कार्यालय से मात्र 100 मीटर की दूरी पर बंद पड़े एक स्कूल से एसडीएम और सीओ ने छापा मारकर 158 क्विंटल गेहूं और चावल पकड़े थे। अधिकारियों के अनुसार गेहूं और चावल सरकारी बोरों से पलटी करके प्राइवेट बोरों में भरा जा रहा था। साथ ही सरकारी राशन को ट्रक में भरकर बाजार भेजा जा रहा था। इतना ही नहीं अधिकारियों ने ट्रक चालक सहित तीन लोगों को भी मौके से हिरासत में लिया था। जिन्होंने अरुण जैन का गेहूं और चावल होना बताया था। जांच के लिए जिला आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया था। रविवार शाम से ही आपूर्ति विभाग की टीम जांच करने का दावा कर रही है लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं कर पाई है।
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इस संबंध में जिला आपूर्ति अधिकारी वीके सिंह का कहना है कि जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जो जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। उधर पकड़े गए गेहूं और चावल को क्षेत्रीय विपणन अधिकारी कार्यालय को सुपुर्द कर दिया है।
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एफसीआई गोदामों पर सक्रिय रहते हैं राशन माफिया
- तकरीबन दो साल पहले सिंघावली अहीर में 327.25 क्विंटल राशन से यह बात साबित हो गयी कि राशन माफिया हर वक्त एफसीआई गोदाम पर सक्रिय रहते हैं, जो विभागीय अफसरों की मिलीभगत से सरकारी राशन की कालाबाजारी करते हैं।

राशन डीलर बोले, कठोर कार्रवाई हो
- राशन विक्रेता एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुधीर दांगी का कहना है कि बिनौली व बड़ौत के एफसीआई गोदाम से राशन डीलरों को हर माह कम राशन दिया जाता है। आशंका है कि राशन डीलरों के बचे हुए इसी राशन को माफिया लोग विभागीय अफसरों की मिलीभगत से खरीदते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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