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बिजरौल गांव में निशादेही करने गई टीम को दौड़ाया

Wed, 16 Mar 2022 10:49 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 10:49 PM IST
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Ran the team that went to Bijraul village to spot
बड़ौत के बिजरौल गांव में सर्वे करने गई टीम को लौटाने के बाद आपसे में बातचीत करते किसान संघर्ष समि? - फोटो : BARAUT
दिल्ली-देहारादून इकोनामिक कॉरिडोर
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किसानों ने धरना देकर जमीन का मुआवजा बढ़ाकर देने की मांग की
बोले, उचित मुआवजा नहीं मिला तो शुरू नहीं होने देंगे सर्वे
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/बड़ौत। दिल्ली-देहारादून इकोनामिक कॉरिडोर के लिए मंगलवार को बिजरौल गांव में निशानदेही करने गई टीम को किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ओर सदस्यों ने दौड़ा लिया। साथ ही मुआवजे की मांग को लेकर धरना भी शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक उन्हें जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिला, तब तक कॉरिडोर से जुड़ा कोई भी कार्य नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस ने भी मामला शांत करने का प्रयास किया।
मंगलवार को दिल्ली-देहारदून कॉरिडोर से जुड़े कर्मचारी बिजरौल गांव मेें निशानदेही करने गए थे। इसकी सूचना पर दिल्ली-देहारादून इकोनमिक कॉरिडार किसान संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष सौराज और सचिव सतेंद्र राठी अन्य कार्यकर्ताओं के के साथ मौके पर पहुंचे और विरोध कर टीम को दौड़ा लिया। इसके बाद बैठक कर धरना शुरू कर दिया। कहना था कि निर्माण कंपनी से जुडे़ अधिकारी वर्ष 2016 के हिसाब से जमीन का मुआवजा देने की बात कर रहे है, जबकि इस समय वर्ष 2022 चल रहा है और सर्किल रेट बढ़ गए है। ऐसे में जमीन का मुआवजा आज के सर्किल रेट के मुताबिक किसानों को चाहिए। सूचना पर पहुंची बड़ौत कोतवाली के दरोगा संजीव भी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक कॉरिडोर से जुड़ा कोई भी कार्य नहीं होने दिया जाएगा। इस अवसर पर आजाद राठी, वेद सिंह, सचिन राठी, संजीव, प्रमोद, मन्नू, वेद सिंह, राजीव, सतेंद्र, आजाद शामिल रहे।
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इसलिए हो रहा कॉरिडोर का विरोध
समिति के सचिव सतेंद्र राठी ने बताया कि दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनामिक कॉरिडोर के लिए बागपत के 27 गांव, मुजफ्फरनगर के सात गांव, शामली के 22 गांव, सहारनपुर के 25 गांव की 1100 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। यह जमीन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से लेकर सहारनपुर तक है, जिसमें बागपत की 350 हेक्टेयर जमीन शामिल है। किसानों को जमीन का 2016 के सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जा रहा है। मगर, किसान वर्ष 2022 के सर्किल रेट के हिसाब से जमीन का मुआवजे की मांग कर रहे है।
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इस तरह होना है कॉरिडोर का निर्माण
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनामिक कॉरिडोर के निर्माण के पहले चरण में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे से दिल्ली-यूपी बॉर्डर तक एलिवेटेड रोड बनना है। इसका 1326 करोड़ रुपये का बजट तैयार हुआ था। दूसरे चरण का शिलान्यास चार दिसंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने देहरादून से किया था, जिस पर 8300 करोड़ रुपये खर्च होने है। इस कॉरिडोर पर हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, बागपत, मेरठ व बड़ौत को जोड़ने के लिए सात जगह इंटरचेंज होंगे। इसके बनने पर दिल्ली से देहरादून छह घंटे की जगह केवल ढाई से तीन घंटे में पहुंच सकेंगे।
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