{"_id":"68bb438abed1aee5f70cf6dd","slug":"rain-news-baghpat-news-c-28-1-bpt1002-137835-2025-09-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: यमुना में जलस्तर कम होने पर कटान जारी, 1500 बीघा में फसल नष्ट हुई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: यमुना में जलस्तर कम होने पर कटान जारी, 1500 बीघा में फसल नष्ट हुई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। यमुना का जलस्तर कम होने के बाद भी कटान जारी है। अभी तक 1500 बीघा फसल नष्ट हो चुकी है। जिन जगहों से पानी उतर गया है, वहां दलदल भी हो गई है। इससे किसान परेशान हैं और इससे वे अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। वहीं जलस्तर कम होने पर सिंचाई विभाग की ओर से कटान रोकने के लिए यमुना किनारे अब बल्ली व मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं।
पहाड़ाेें पर लगातार बारिश होने के कारण हथिनीकुंड बैराज से एक साथ सवा तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ने पर बाढ़ की स्थिति हो गई थी। अब शुक्रवार को 72 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है और जलस्तर कम होता जा रहा है। इसके बाद भी किसानों को अभी राहत नहीं मिल रही है। यमुना में कटान होने के कारण किसानों की अभी तक 1500 बीघा जमीन यमुना में समा गई है और किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों के सामने पशुओं के लिए चारा और सब्जियों की परेशानी खड़ी हो रही है। वे अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि वहां दलदल होने के कारण फिसलकर यमुना में गिरने का खतरा बना हुआ है।
--
सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए शुरू किया कार्य
सिंचाई विभाग के कर्मियों ने भी जलस्तर कम होने के बाद शबगा व जागौस गांव में कटान को रोकने के लिए यमुना किनारे बल्ली लगानी शुरू कर दी है और वहां मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं ताकि यमुना का जलस्तर बढ़ने से कटान न हो सकें और किसानों की फसल यमुना में न समा सके। इसके अलावा अन्य गांवों में जहां कटान हुआ है, वहां भी कार्य शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
--
ज्वार, ईख व सब्जी की फसल नष्ट
यमुना नदी किनारे के अधिकांश खेतों में सब्जी और पशुओं का चारा उगाया गया है। कटान होने के कारण किसानों की फसल यमुना में समा गई है। इससे वहां ज्वार व ईख और सब्जी की की फसल नष्ट हो गई है। इससे किसान काफी परेशान हैं और किसान प्रशासन से मुआवजा की मांग कर रहे हैं।
--
खेतों में घुसा कृष्णा नदी का पानी, फसल जलमग्न
दोघट। कृष्णा नदी में पिछले तीन दिन से लगातार जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इसके कारण कृष्णा नदी का पानी टीकरी, गांगनौली, थल, बूढ़पुर, असारा, रहतना, रंछाड़, बामनौली, कंडेरा, मौजिजाबाद नांगल व भगवानपुर आदि गांवों खेतों में पानी घुस गया है। इससे खेतों में खड़ी किसानों की ईख, ज्वार, गोभी व मिर्च आदि की फसल जलमग्न हो गई है। किसान राज सिंह, सूरज, संजीव व जयवीर आदि ने बताया कि खेतों में पानी घुसने से फसल बर्बाद हो रही है। इससे किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा होगा। किसानों की 800 बीघा फसलों में पानी घुस चुका है और किसान अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें फसलों की चिंता सता रही है।
--
-यमुना का जलस्तर कम होने के बाद भी खेतों में पानी भरा हुआ है। दलदल होने के कारण खेतों में नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस बार किसानों को काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा दिलवाने की मांग की। -राकेश, बागपत
- शबगा गांव की सात सौ बीघा से अधिक जमीन यमुना में समा गई है। किसानों की ईख, ज्वार व सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचा है। अभी भी कटान होने के कारण किसान परेशान है। -राजीव, शबगा
--
वर्जन
- शबगा व जागौस में अधिक कटान के कारण यमुना में किसानों की जमीन समा गई थी। अब जलस्तर कम होने के बाद कटान रोकने के लिए यमुना के किनारे बल्ली व मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं। -रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
विज्ञापन
पहाड़ाेें पर लगातार बारिश होने के कारण हथिनीकुंड बैराज से एक साथ सवा तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ने पर बाढ़ की स्थिति हो गई थी। अब शुक्रवार को 72 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है और जलस्तर कम होता जा रहा है। इसके बाद भी किसानों को अभी राहत नहीं मिल रही है। यमुना में कटान होने के कारण किसानों की अभी तक 1500 बीघा जमीन यमुना में समा गई है और किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। किसानों के सामने पशुओं के लिए चारा और सब्जियों की परेशानी खड़ी हो रही है। वे अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि वहां दलदल होने के कारण फिसलकर यमुना में गिरने का खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन
सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए शुरू किया कार्य
सिंचाई विभाग के कर्मियों ने भी जलस्तर कम होने के बाद शबगा व जागौस गांव में कटान को रोकने के लिए यमुना किनारे बल्ली लगानी शुरू कर दी है और वहां मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं ताकि यमुना का जलस्तर बढ़ने से कटान न हो सकें और किसानों की फसल यमुना में न समा सके। इसके अलावा अन्य गांवों में जहां कटान हुआ है, वहां भी कार्य शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
ज्वार, ईख व सब्जी की फसल नष्ट
यमुना नदी किनारे के अधिकांश खेतों में सब्जी और पशुओं का चारा उगाया गया है। कटान होने के कारण किसानों की फसल यमुना में समा गई है। इससे वहां ज्वार व ईख और सब्जी की की फसल नष्ट हो गई है। इससे किसान काफी परेशान हैं और किसान प्रशासन से मुआवजा की मांग कर रहे हैं।
खेतों में घुसा कृष्णा नदी का पानी, फसल जलमग्न
दोघट। कृष्णा नदी में पिछले तीन दिन से लगातार जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इसके कारण कृष्णा नदी का पानी टीकरी, गांगनौली, थल, बूढ़पुर, असारा, रहतना, रंछाड़, बामनौली, कंडेरा, मौजिजाबाद नांगल व भगवानपुर आदि गांवों खेतों में पानी घुस गया है। इससे खेतों में खड़ी किसानों की ईख, ज्वार, गोभी व मिर्च आदि की फसल जलमग्न हो गई है। किसान राज सिंह, सूरज, संजीव व जयवीर आदि ने बताया कि खेतों में पानी घुसने से फसल बर्बाद हो रही है। इससे किसानों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट भी पैदा होगा। किसानों की 800 बीघा फसलों में पानी घुस चुका है और किसान अपने खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। उन्हें फसलों की चिंता सता रही है।
-यमुना का जलस्तर कम होने के बाद भी खेतों में पानी भरा हुआ है। दलदल होने के कारण खेतों में नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस बार किसानों को काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन से सर्वे कराकर मुआवजा दिलवाने की मांग की। -राकेश, बागपत
- शबगा गांव की सात सौ बीघा से अधिक जमीन यमुना में समा गई है। किसानों की ईख, ज्वार व सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचा है। अभी भी कटान होने के कारण किसान परेशान है। -राजीव, शबगा
वर्जन
- शबगा व जागौस में अधिक कटान के कारण यमुना में किसानों की जमीन समा गई थी। अब जलस्तर कम होने के बाद कटान रोकने के लिए यमुना के किनारे बल्ली व मिट्टी से भरकर बोरे रखे जा रहे हैं। -रजनीश कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग