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निगरानी समिति की कार्य प्रणाली पर उठ रहे सवाल

Sat, 22 May 2021 11:19 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 22 May 2021 11:19 PM IST
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Questions arising on the functioning of the monitoring committee
बड़ौत। कोरोना काल में जनता के बीच जागरूकता फैलाने और मरीजों पर निगरानी रखने के लिए गठित की गई निगरानी समितियों की कार्य प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। गांवों में निगरानी समिति के सदस्य अपनी जिम्मेदारी भूल रहे हैं। जबकि गांवों में बुखार और कोरोना संक्रमण फैल रहा है। न तो मरीजों की कोरोना जांच कराई जा रही है और न ही मेडिसन किट पहुंचाई जा रही है। ग्रामवासियों का आरोप है कि समिति के सभी सदस्य केवल औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।
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प्रवासी श्रमिकों के वापस गांव लौटने पर निगरानी रखने के लिए समितियों का गठन किया गया। प्रधान की अध्यक्षता में गठित समिति में पंचायत सचिव, एएनएम, आशा बहू, लेखपाल, अध्यापक को शामिल किया गया था। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुए पंचायत चुनाव में अधिकांश गांवों में नए प्रधान चुने गए। नए प्रधानों को इसकी जानकारी तक नहीं है। ग्रामीण सुधीर, पंकज, विपिन, राहुल, मनोहर सिंह का कहना है कि जिन कर्मचारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है वह रुचि नहीं ले रहे हैं। इस संबंध में बीडीओ राहुल वर्मा का कहना है कि निगरानी समितियों की बैठक गांव में खुले स्थान पर कराने का निर्देश हैं। गांव में बाहर से आने वाले लोगों की जांच करने का अधिकार निगरानी समिति को है।
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