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ऊंटनियों की मौत के मामले में दायर याचिका खारिज

Wed, 13 Oct 2021 11:33 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 13 Oct 2021 11:33 PM IST
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Petition filed in the case of death of camels dismissed
एक व्यक्ति ने इंस्पेक्टर, एसआई सहित चार पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोर्ट में डाली थी याचिका
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। ऊंटनियों की मौत होने के मामले से इंस्पेक्टर, दरोगा व सिपाहियों का तीन साल बाद पीछा छूट ही गया। पुलिस ने कई लोगों को चार ऊंटनियों के साथ पकड़ा था। उन ऊंटनियों की मौत हो गई थी। व्यक्ति ने इसे मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
बागपत के पुराने कस्बे के केतीपुरा मोहल्ला के आसिफ ने कोर्ट में याचिका दायर थी कि 21 जुलाई 2018 को वह अपने साथियों शेरखान, अनस, वसीम व सलीम के साथ चार ऊंटनियों को चराने लेकर गया था। तभी तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश चिकारा, एसआई रणधीर सिंह, हेड कांस्टेबल सूरजपाल, कांस्टेबल धर्मेंद्र ने उसे व उसके साथियों को ऊंटनियों सहित पकड़ लिया। उनको छोड़ने के लिए पचास हजार रुपये मांगे गए थे। वह रुपये नहीं दे सके तो उन पर पशु क्रूरता अधिनियम में मुकदमा दर्ज करके जेल भेज दिया। उसने बाद में चारों ऊंटनियों को रिलीज कराने के लिए सीजेएम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर थाना प्रभारी दिनेश चिकारा ने रिपोर्ट दी कि एक ऊंटनी की मौत हो चुकी है और अन्य तीन ऊंटनी सोनीपत के राई में श्रीराम गोशाला में रखी गई है। 27 जुलाई को कोर्ट ने तीन ऊंटनियों को रिलीज कराने का आदेश जारी कर दिया। जब वह कोतवाली में ऊंटनियों को लेने पहुंचा तो उसे तीनों के मरने की बात कही गई। उसने सीजेएम कोर्ट में दोबारा से प्रार्थना पत्र दिया तो तब कोतवाली पुलिस ने तीन अन्य ऊंटनियों के भी मरने की रिपोर्ट दी। इस तरह ऊंटनियों की मौत के जिम्मेदार थाना प्रभारी दिनेश चिकारा, एसआई रणधीर सिंह, सिपाहियों सूरजपाल व धर्मेंद्र को बताते हुए मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई थी।
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सीजेएम कोर्ट में छह जनवरी 2020 को याचिका को खारिज कर दिया था। लेकिन आसिफ ने दोबारा से मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश की कोर्ट में डाल दिया तो वहां से उसे अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अवध बिहारी सिंह की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अनुज ढाका ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की कोर्ट ने सीजेएम के आदेश को सही मानते हुए याचिका को खारिज कर दिया है।
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