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Baghpat News: परवेज मुशर्रफ को कारगिल युद्ध का गुनहगार मानते हैं कोताना के लोग

Mon, 06 Feb 2023 10:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
मुकेश पंवार, संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत Updated Mon, 06 Feb 2023 10:03 AM IST
सार

परवेज मुशर्रफ के निधन पर कोताना के ग्रामीणों से बात की गई तो उनका कहना कि जो यहां है ही नहीं, उसके मरने से उन्हें क्या लेना-देना ?

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People of Kotana consider Pervez Musharraf guilty of Kargil war
कोताना गांव में परवेज मुशर्रफ के ददिहाल में बची दीवार व सीढि़या

विस्तार

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का दुबई के एक अस्पताल में रविवार को निधन हो गया। उनका जन्म दिल्ली में हुआ था लेकिन उनकी ददिहाल और ननिहाल बागपत जिले के गांव कोताना में थी। कोताना के लोग उन्हें कारगिल युद्ध का गुनहगार मानते हैं, यही वजह है कि उनके निधन पर यहां शोक व्यक्त करना तो दूर, कोई दो शब्द संवेदना के भी बोलने को तैयार नहीं है।
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मुशर्रफ की मां बेगम जरीन और पिता मुशर्रफुद्दीन दोनों ही कोताना के रहने वाले थे। हालांकि मुशर्ऱफ का जन्म 1943 में दिल्ली के दरियागंज में हुआ था। उनके जन्म से काफी परिजन दिल्ली चले गए थे। बंटवारे के दौरान उनका परिवार दिल्ली से पाकिस्तान चला गया था। कुछ रिश्तेदार दिल्ली में रहते हैं। परवेज मुशर्रफ के निधन पर कोताना के ग्रामीणों से बात की गई तो उनका कहना कि जो यहां है ही नहीं, उसके मरने से उन्हें क्या लेना-देना ? प्रधान मुकीद खान, जावेद, मिंटू, इमरान, आमिर, कय्यूम, उद्दे खान, इलियास आदि बताया कि उन्हें खूब याद है कि गली के एक तरफ मुशर्रफ के पिता का महल था दूसरी ओर उनके चाचा का, उनकी मां बेगम जरीन भी यहीं की ही थी और यहीं पर उनकी शादी भी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि कारगिल युद्ध के लिए हिंदुस्तान के गुनहगार मुशर्रफ ही थे। इस युद्ध में हमारे देश के न जाने कितने लाल शहीद हुए। यही कारण है कि हमें उनके मरने का कोई दुख नहीं हैं।
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अब तो बस दीवार के निशां बाकी
परवेज के पूर्वज जिस मकान में रहा करते थे, वह कभी आलीशान महल था। नक्कासी की हुईं दीवारें, स्तंभ, पत्थरों के अवशेषों को यहां के निवासी उठाकर ले गए थे। हालांकि महल की दीवार अभी बची है। महल में मौजूद रही एक सीढ़ी भी दिखाई देती है। महल को तोड़कर एक समतल कर दिया गया और एक प्लाट का रूप देकर उसे बेचा जा चुका है।
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मां जरीन को कोताना आने की नहीं मिली थी अनुमति
परवेज मुशर्ऱफ के पिता और मां जरीन दोनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में पढ़े थे। दादा ब्रिटिश सरकार में दिल्ली में मुलाजिम थे। ग्रामीणों ने बताया कि 2005 में परवेज मुशर्रफ की मां जरीन दिल्ली आई। तब वह अपने पूर्वजों के गांव कोताना आना चाहती थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी यह हसरत पूरी नहीं हो पाई थी।

कोताना गांव में परवेज मुशर्रफ के ददिहाल में बची दीवार व सीढि़या

कोताना गांव में परवेज मुशर्रफ के ददिहाल में बची दीवार व सीढि़या

 

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