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एक हजार हेक्टेयर बढ़ गया धान का रकबा
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एक हजार हेक्टेयर बढ़ गया धान का रकबा
बागपत। बेहतर मानसून की उम्मीद में इस बार किसानों ने धान की रोपाई भी अधिक की है। पिछले साल के सापेक्ष इस बार जिले में धान का एक हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ गया है। किसानों को उम्मीद है कि इस बार धान की उत्पादन अधिक होगा।
वर्तमान में जिलेभर में धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। धान की फसल के लिए अधिक पानी की जरूरत होती है। समय पर मानसून की सूचनाओं के बीच इस बार जिले में पांच हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की, जो पिछले साल से एक हजार हेक्टेयर अधिक है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार मानसून समय पर आने से जिले में धान का रकबा बढ़ गया है।
धान की इन प्रजातियों की रोपाई
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में सबसे अधिक बासमती धान की पीबी 1121 और पीबी 1509 की रोपाई की जाती है। दूसरे स्थान पर पीबी-वन की रोपाई होती है।
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ऐसे करें फसल का बचाव
रोपाई के 15 से 20 दिन में फसल में खैरा रोग लगने का खतरा रहता है। फसल में खैरा रोग जिंक की कमी के कारण होता है। खैरा रोग लगने पर फसल में दो किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव कराने से फसल को रोग से बचाया जा सकता है। इसके अलावा फसल में चौड़ी व बारिक पत्ती के खरपतवार हो पैदा हो जाता है। चौड़ी पत्ती खरपतवार होने पर किसान टू फोर डी 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करने और बारीक पत्ती के खरपतवार के लिए डिस्पायरी बैक सोडियम साल्ट का 100 एमएल का प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करने से लाभ मिलेगा।
क्या कहते हैं किसान
किसान मनोज कुमार, सुभाष नैन और संजीव कुमार का कहना है कि उम्मीद के अनुरूप अगर बारिश हुई तो किसानों को लाभ होगा।
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बागपत। बेहतर मानसून की उम्मीद में इस बार किसानों ने धान की रोपाई भी अधिक की है। पिछले साल के सापेक्ष इस बार जिले में धान का एक हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ गया है। किसानों को उम्मीद है कि इस बार धान की उत्पादन अधिक होगा।
वर्तमान में जिलेभर में धान की रोपाई का कार्य चल रहा है। धान की फसल के लिए अधिक पानी की जरूरत होती है। समय पर मानसून की सूचनाओं के बीच इस बार जिले में पांच हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की, जो पिछले साल से एक हजार हेक्टेयर अधिक है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि इस बार मानसून समय पर आने से जिले में धान का रकबा बढ़ गया है।
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धान की इन प्रजातियों की रोपाई
जिला कृषि अधिकारी डॉ. सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में सबसे अधिक बासमती धान की पीबी 1121 और पीबी 1509 की रोपाई की जाती है। दूसरे स्थान पर पीबी-वन की रोपाई होती है।
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ऐसे करें फसल का बचाव
रोपाई के 15 से 20 दिन में फसल में खैरा रोग लगने का खतरा रहता है। फसल में खैरा रोग जिंक की कमी के कारण होता है। खैरा रोग लगने पर फसल में दो किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव कराने से फसल को रोग से बचाया जा सकता है। इसके अलावा फसल में चौड़ी व बारिक पत्ती के खरपतवार हो पैदा हो जाता है। चौड़ी पत्ती खरपतवार होने पर किसान टू फोर डी 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करने और बारीक पत्ती के खरपतवार के लिए डिस्पायरी बैक सोडियम साल्ट का 100 एमएल का प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करने से लाभ मिलेगा।
क्या कहते हैं किसान
किसान मनोज कुमार, सुभाष नैन और संजीव कुमार का कहना है कि उम्मीद के अनुरूप अगर बारिश हुई तो किसानों को लाभ होगा।