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अब तक सिर्फ सात हजार मिस कॉल, मैदान में उतरे संगठन मंत्री
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बागपत। सीएए के समर्थन में भाजपा का मिस्ड कॉल अभियान हिचकोले खा रहा है। 13 लाख की आबादी वाले जिले से अब तक सिर्फ सात हजार 435 मिस्ड कॉल सीएए के समर्थन में दी गई है। जबकि जिले की सियासत के हर स्तंभ पर भाजपा का परचम लहरा रहा है। यहीं वजह है कि प्रदेश संगठन मंत्री को अभियान को गति देने के लिए खुद मैदान में उतरना पड़ा है।
जिले की सियासत में भाजपा का दबदबा है। यही कारण है कि सांसद डॉ सत्यपाल सिंह दोबारा निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे। इसके अलावा बागपत से योगेश धामा, बड़ौत से केपी मलिक और छपरौली से सहेंद्र सिंह चौहान विधायक हैं। सबसे बड़ी पालिका बड़ौत पर भाजपा के चेयरमैन अमित राणा हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर बागपत के विधायक योगेश धामा की पत्नी रेणू धामा काबिज हैं। भाजपा जिले में मजबूती के साथ खड़ी दिखती है, लेकिन मिस्ड कॉल अभियान की हालत सही नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक जिले से सीएए के समर्थन में केवल सात हजार 435 मिस्ड कॉल पहुंची हैं। भाजपा ने एक फरवरी से अलग प्रकोष्ठ बनाकर मैदान में उतारा, लेकिन 13 लाख की आबादी वाले जिले में अभियान अपेक्षित तौर पर गति नहीं पकड़ पाया है। यहीं वजह है कि शनिवार को खुद संगठन मंत्री सुनील बंसल मैदान में उतरे।
सुस्त रफ्तार के लिए दिल्ली चुनाव वजह
बागपत। मिस्ड कॉल अभियान के प्रभारी वीरेश तोमर का कहना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से अभियान पर असर पड़ा है। अधिकतर जनप्रतिनिधि दिल्ली के प्रचार में व्यस्त थे। लेकिन आने वाले तीन दिनों में कार्यकर्ता अभियान को कवर कर लेंगे।
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जिले की सियासत में भाजपा का दबदबा है। यही कारण है कि सांसद डॉ सत्यपाल सिंह दोबारा निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे। इसके अलावा बागपत से योगेश धामा, बड़ौत से केपी मलिक और छपरौली से सहेंद्र सिंह चौहान विधायक हैं। सबसे बड़ी पालिका बड़ौत पर भाजपा के चेयरमैन अमित राणा हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर बागपत के विधायक योगेश धामा की पत्नी रेणू धामा काबिज हैं। भाजपा जिले में मजबूती के साथ खड़ी दिखती है, लेकिन मिस्ड कॉल अभियान की हालत सही नहीं है। आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक जिले से सीएए के समर्थन में केवल सात हजार 435 मिस्ड कॉल पहुंची हैं। भाजपा ने एक फरवरी से अलग प्रकोष्ठ बनाकर मैदान में उतारा, लेकिन 13 लाख की आबादी वाले जिले में अभियान अपेक्षित तौर पर गति नहीं पकड़ पाया है। यहीं वजह है कि शनिवार को खुद संगठन मंत्री सुनील बंसल मैदान में उतरे।
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सुस्त रफ्तार के लिए दिल्ली चुनाव वजह
बागपत। मिस्ड कॉल अभियान के प्रभारी वीरेश तोमर का कहना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से अभियान पर असर पड़ा है। अधिकतर जनप्रतिनिधि दिल्ली के प्रचार में व्यस्त थे। लेकिन आने वाले तीन दिनों में कार्यकर्ता अभियान को कवर कर लेंगे।
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