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सेवा भाव से किए गए कार्य ही वास्तविक पुण्य कर्म : अनुभूति माता

Sun, 24 May 2026 02:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 02:40 AM IST
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Only actions performed with a spirit of service constitute true meritorious deeds: Anubhuti Mata
-बड़ागांव के त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में हुआ भक्तामर महामंडल विधान
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फोटो नंबर 23केएआर 1
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में शनिवार को भक्तामर महामंडल विधान हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की नित्य नियम पूजा की और विशेष अनुष्ठानों में भाग लिया। धर्म सभा में अनुभूति माता ने मानव सेवा और भक्ति के महत्व पर प्रवचन दिए।


विधान की शुरुआत भगवान के अभिषेक, शांतिधारा और मंडप की शुद्धि के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने 48 दीपों से भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की। अनुभूति माता ने अपने प्रवचन में कहा कि दीन-दुखियों की सेवा करने से वास्तविक पुण्य लाभ मिलता है। उन्होंने जोर दिया कि मनुष्य को भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए। माता ने बताया कि सेवा भाव से किए गए कार्य ही वास्तविक पुण्य कर्म होते हैं। इन्हीं कर्मों से मनुष्य को जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान की भक्ति और मानव सेवा के माध्यम से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। इस अवसर पर त्रिलोकचंद जैन, श्यामलाल जैन, अभिषेक जैन, दीपक जैन और संदीप जैन सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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