{"_id":"62a22aa3801a462e33419abf","slug":"obstacles-are-removed-by-observing-nirjala-ekadashi-fast-baghpat-news-mrt5921239160","type":"story","status":"publish","title_hn":"निर्जला एकादशी का व्रत करने से दूर हो जाती है जीवन की बाधाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निर्जला एकादशी का व्रत करने से दूर हो जाती है जीवन की बाधाएं
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एकादशी का दान करने से होती है विशेष फल की प्राप्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। विधि-विधान से निर्जला एकादशी का व्रत करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। बाबा जानकीदास मंदिर में मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के उपासना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से साल भर की एकादशी के व्रत का फल मिलता है।
उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत दस जून शुक्रवार को है। एकादशी तिथि शुक्रवार सुबह 7 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर शनिवार सुबह 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध और झूठ से दूर रहना चाहिए। सुबह में स्नान कर सूर्य देवता को अर्घ्य दें और फिर पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। निर्जला एकादशी पर गरीबों को अन्न, वस्त्र, बिस्तर, छाता और जल के पात्र का दान करना, ब्राह्मण को जूते का दान करना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी और जरूरतमंद को भोजन कराने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी व्रत सभी तीर्थों में स्नान करने के समान होता है। निर्जला एकादशी पर मटके में ठंडा व मीठा जल भरकर दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है। विधि-विधान से निर्जला एकादशी का व्रत करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। बाबा जानकीदास मंदिर में मुख्य पुजारी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के उपासना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से साल भर की एकादशी के व्रत का फल मिलता है।
उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी का व्रत हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस बार निर्जला एकादशी का व्रत दस जून शुक्रवार को है। एकादशी तिथि शुक्रवार सुबह 7 बजकर 25 मिनट से शुरू होकर शनिवार सुबह 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। व्रत रखने वाले व्यक्ति को क्रोध और झूठ से दूर रहना चाहिए। सुबह में स्नान कर सूर्य देवता को अर्घ्य दें और फिर पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। निर्जला एकादशी पर गरीबों को अन्न, वस्त्र, बिस्तर, छाता और जल के पात्र का दान करना, ब्राह्मण को जूते का दान करना, पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी और जरूरतमंद को भोजन कराने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। निर्जला एकादशी व्रत सभी तीर्थों में स्नान करने के समान होता है। निर्जला एकादशी पर मटके में ठंडा व मीठा जल भरकर दान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
विज्ञापन