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Baghpat News: पोषण पुनर्वास केंद्र खाली, घरों में कुपोषण से लड़ रहे बच्चे
Sat, 26 Apr 2025 01:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 26 Apr 2025 01:50 AM IST
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बागपत। घरों में बच्चे कुपोषण से जंग लड़ रहे हैं, लेकिन अभिभावक उन्हें अस्पताल में भर्ती हीं करा रहे हैं। बच्चों के भर्ती नहीं होने के कारण पोषण पुनर्वास केंद्र खाली है। विभाग भी बच्चों को भर्ती कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है।
जिला कार्यक्रम विभाग ने 350 से अधिक बच्चों को अतिकुपोषित श्रेणी में रखा गया है। शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार जन्म लेने के बाद से ही बच्चों को टीके लगाने के साथ ही पौष्टिक आहार आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता के माध्यम से पहुंचा रही हैं। इनमें भी अगर कोई बच्चा पौष्टिक आहार के बिना उम्र के हिसाब से कमजोर है और जांच में कुपोषित या अतिकुपोषित मिल रहा है।
ऐसी दशा में उसकी सेहत सुधारने के लिए आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनकी खून से संबंधित जांच करवाती हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में बने एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र ) में 15 दिन रखा जाता है। मगर उनके उपचार के लिए जिम्मेदार ही इसपर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाने और पौष्टिक आहार देने में कोताही बरती जा रही है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में इस समय सिर्फ अतिकुपोषित पांच बच्चे भर्ती है। पोषण पुनर्वास केंद्र के आंकड़ों के अनुसार पूरे मार्च में वहां सिर्फ 15 बच्चे ही भर्ती किए गए। 24 अप्रैल तक सिर्फ 12 बच्चे ही भर्ती हुए हैं।
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अभिभावक भी बच्चों को भर्ती कराने के लिए नहीं होते तैयार
जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र में अभिभावक भी बच्चों को भर्ती कराने के लिए तैयार नहीं होते हैं। उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन सामने रोजी रोटी की दिक्कत आती है। एक व्यक्ति को कई दिन तक अस्पताल में बच्चे के साथ रहना पड़ता है। इसलिए वह बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए रूचि नहीं लेते हैं।
वर्जन- अतिकुपोषित बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके बाद भी वह भर्ती नहीं कराना चाहते हैं। फिर से कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। - नागेंद्र मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जिला कार्यक्रम विभाग ने 350 से अधिक बच्चों को अतिकुपोषित श्रेणी में रखा गया है। शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए सरकार जन्म लेने के बाद से ही बच्चों को टीके लगाने के साथ ही पौष्टिक आहार आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता के माध्यम से पहुंचा रही हैं। इनमें भी अगर कोई बच्चा पौष्टिक आहार के बिना उम्र के हिसाब से कमजोर है और जांच में कुपोषित या अतिकुपोषित मिल रहा है।
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ऐसी दशा में उसकी सेहत सुधारने के लिए आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनकी खून से संबंधित जांच करवाती हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में बने एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र ) में 15 दिन रखा जाता है। मगर उनके उपचार के लिए जिम्मेदार ही इसपर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र पहुंचाने और पौष्टिक आहार देने में कोताही बरती जा रही है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल में दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में इस समय सिर्फ अतिकुपोषित पांच बच्चे भर्ती है। पोषण पुनर्वास केंद्र के आंकड़ों के अनुसार पूरे मार्च में वहां सिर्फ 15 बच्चे ही भर्ती किए गए। 24 अप्रैल तक सिर्फ 12 बच्चे ही भर्ती हुए हैं।
अभिभावक भी बच्चों को भर्ती कराने के लिए नहीं होते तैयार
जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र में अभिभावक भी बच्चों को भर्ती कराने के लिए तैयार नहीं होते हैं। उन्हें जागरूक भी किया जा रहा है, लेकिन सामने रोजी रोटी की दिक्कत आती है। एक व्यक्ति को कई दिन तक अस्पताल में बच्चे के साथ रहना पड़ता है। इसलिए वह बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए रूचि नहीं लेते हैं।
वर्जन- अतिकुपोषित बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसके बाद भी वह भर्ती नहीं कराना चाहते हैं। फिर से कुपोषित बच्चों को भर्ती कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। - नागेंद्र मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी