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नई शिक्षा नीति बनेगी हिंदी के प्रचार प्रसार का सुगम एवं सरल मार्ग
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हिंदी है हम
बड़ौत। हिंदी भाषा हमारे लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है। यह आसानी से समझ आने वाली भाषा है। संस्कारयुक्त भाषा हिंदी देश के हर कोने में बोती व सुनी जाती है। इसलिए विभिन्न कार्यों में हिंदी का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सभी को हिंदी का प्रयोग व हिंदी बोलने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
हिंदी रोजगारपरक भाषा
हिंदी हमारी राजभाषा है। इसके बावजूद अन्य भाषाएं सीखने की चाह में इसे भूलते जा रहे हैं। यह सर्वथा गलत है। हिंदी जितनी आम बोलचाल की भाषा है उतनी ही रोजगारपरक भी है। इसलिए इसे अपनाने में संकोच नहीं होना चाहिए-तनिशा
कार्यालयों में कामकाज हो
हिंदी के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में इसका बखुबी प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने से हिंदी का प्रचार-प्रसार पूरी तरह से नहीं हो सकेगा। सरकार को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए।-खुशी
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हिंदी के मूल आवश्यकता
भाषा किसी भी राष्ट्र की मूलभूत आवश्यकता है। हिंदी भाषा आज भी अहम भूमिका निभा रही है। हिंदुस्तान में रहते हुए चाहे कितनी भी अंग्रेजी का अभ्यास कर लें, लेकिन हिंदी के बिना हम कुछ भी नहीं हैं।-अंशिका
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बड़ौत। हिंदी भाषा हमारे लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है। यह आसानी से समझ आने वाली भाषा है। संस्कारयुक्त भाषा हिंदी देश के हर कोने में बोती व सुनी जाती है। इसलिए विभिन्न कार्यों में हिंदी का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सभी को हिंदी का प्रयोग व हिंदी बोलने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
हिंदी रोजगारपरक भाषा
हिंदी हमारी राजभाषा है। इसके बावजूद अन्य भाषाएं सीखने की चाह में इसे भूलते जा रहे हैं। यह सर्वथा गलत है। हिंदी जितनी आम बोलचाल की भाषा है उतनी ही रोजगारपरक भी है। इसलिए इसे अपनाने में संकोच नहीं होना चाहिए-तनिशा
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कार्यालयों में कामकाज हो
हिंदी के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में इसका बखुबी प्रयोग किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने से हिंदी का प्रचार-प्रसार पूरी तरह से नहीं हो सकेगा। सरकार को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए।-खुशी
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हिंदी के मूल आवश्यकता
भाषा किसी भी राष्ट्र की मूलभूत आवश्यकता है। हिंदी भाषा आज भी अहम भूमिका निभा रही है। हिंदुस्तान में रहते हुए चाहे कितनी भी अंग्रेजी का अभ्यास कर लें, लेकिन हिंदी के बिना हम कुछ भी नहीं हैं।-अंशिका