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शक्ति की उपासना के लिए सबसे उत्तम है नवरात्र : त्र्यम्बकेश्वर महाराज
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प्रवचन सुनाते स्वामी श्री त्रयम्बकेश्वर जी महाराज
- फोटो : BAGHPAT
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अमीनगर सराय। कस्बा अमीनगर सराय में चल रहे आयुतर्द्ध चंडी महायज्ञ व श्रीमद्देवी भागवत कथा महापुराण के आठवें दिन भगवती के महागौरी स्वरूप की आराधना की गई। कथा व्यास त्रयंबकेश्वर जी महाराज ने कहा शक्ति प्राप्ति का केवल एक ही माध्यम नवरात्र है। माता प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करती है।
आचार्य दिवाकर वसिष्ठ ने यजमानों को गणेश पूजन के बाद शतचंडी पाठ कराकर उनके निहितार्थ आहुतियां दी गई। मंगल आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। कथा व्यास स्वामी त्रयंबकेश्वर महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि नवरात्र में भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अलग अलग तरह से भगवती को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते है। जिसकी जैसी भावना होती है उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है। जरूरी नहीं के मां को छप्पन भोग लगाए जाएं। भगवती तो केवल लौंग के जोड़े से भी प्रसन्न होकर मनोवांछित फल दे देती है। माता का स्वभाव ही इतना निर्मल व कोमल है कि भक्त को उसकी इच्छा के जैसा फल प्रदान करती है। जगतजनी जग का कल्याण करने के लिए साल में दो बार दर्शन देती है। शक्ति की आराधना से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते है और उसे आनंद की अनुभूति होती है।। शनिवार को कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष वाचस्पति महाराज पहुंचे।
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पंखा शोभायात्रा कर निकाली गई
भगवती की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बैंड की धुनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। दुर्गा मंदिर से शुरू की गई शोभायात्रा कस्बे के मुख्य बाजार से होते हुए मनसा मंदिर पर पहुंची, जहां भगवती पर पंखा चढ़ाकर प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में विनोद सिंघल, गौरीशंकर सिंघल, हिमांशु गर्ग, मोहनलाल, सौरभ कंसल मौजूद रहे।
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आचार्य दिवाकर वसिष्ठ ने यजमानों को गणेश पूजन के बाद शतचंडी पाठ कराकर उनके निहितार्थ आहुतियां दी गई। मंगल आरती कर प्रसाद वितरित किया गया। कथा व्यास स्वामी त्रयंबकेश्वर महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि नवरात्र में भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अलग अलग तरह से भगवती को प्रसन्न करने का प्रयत्न करते है। जिसकी जैसी भावना होती है उसको वैसा ही फल प्राप्त होता है। जरूरी नहीं के मां को छप्पन भोग लगाए जाएं। भगवती तो केवल लौंग के जोड़े से भी प्रसन्न होकर मनोवांछित फल दे देती है। माता का स्वभाव ही इतना निर्मल व कोमल है कि भक्त को उसकी इच्छा के जैसा फल प्रदान करती है। जगतजनी जग का कल्याण करने के लिए साल में दो बार दर्शन देती है। शक्ति की आराधना से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते है और उसे आनंद की अनुभूति होती है।। शनिवार को कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष वाचस्पति महाराज पहुंचे।
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पंखा शोभायात्रा कर निकाली गई
भगवती की शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बैंड की धुनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। दुर्गा मंदिर से शुरू की गई शोभायात्रा कस्बे के मुख्य बाजार से होते हुए मनसा मंदिर पर पहुंची, जहां भगवती पर पंखा चढ़ाकर प्रसाद वितरित किया गया। कार्यक्रम में विनोद सिंघल, गौरीशंकर सिंघल, हिमांशु गर्ग, मोहनलाल, सौरभ कंसल मौजूद रहे।

अमीनगर सराय में प्रवचन सुनती महिला श्रद्घालु- फोटो : BAGHPAT

यज्ञशाला का परिक्रमा करते श्रद्घालु- फोटो : BAGHPAT
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