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नंदन कानन पार्क का होगा कायाकल्प
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बागपत। नंदन कानन पार्क का जल्द ही कायाकल्प होगा। इसे लोगों के घूमने-फिरने के लिए भव्य बनाया जाएगा। शुक्रवार को जिलाधिकारी राजकमल यादव ने पाक का निरीक्षण कर अधिकारियों को पार्क की सफाई कराकर भव्य बनाने के निर्देश दिए।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से घूमने के लिए सोनीपत रोड पर नंदन कानन पार्क का निर्माण कराया गया था। पार्क की भव्यता के लिए पार्क में फव्वारे लगाए गए और कैंटीन का निर्माण कराया गया था। मगर, रख-रखाव के अभाव में पार्क बदहाल हो गया। बाउंड्री टूटी और झूले टूट गए है। पार्क के गेट पर शहीदों के शिलापट झाड़ियों में छिप गए है। गंदगी के कारण लोग पार्क में जाने से परहेज करते है। डीएम राजकमल यादव ने अधिकारियों को पार्क की सफाई कराने, बाउंड्री और झूलों को ठीक कराने के निर्देश दिए। इसके बाद पार्क की सफाई शुरू हो गई।
2005 में हुआ था उद्घाटन
पार्क का उद्घाटन 24 सिंतबर 2005 को तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन एवं ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री नवाब कोकब हमीद ने किया था। कुछ दिन लोग पार्क में घूमने भी पहुंचे। मगर, बाद में देखरेख के अभाव में इस पार्क की हालत खराब होती चली गई।
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झाड़ियों में छिप गए शिलापट
गेट पर एक ओर पार्क का नाम तथा दूसरी ओर बागपत के वीर सपूतों के नाम की शिलापट लगाई गई थी। गेट पर दोनों और बड़ी झाड़ियां होने के कारण शिलापट पर शहीदों के नाम और पार्क का नाम दिखाई नहीं देता है। अब यहां असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है।
बाउंड्री हो गई जर्जर, झूले टूटे
रख-रखाव के अभाव में पार्क की बाउंड्री जर्जर होने लगी है। पार्क के दूसरी ओर की दीवार टूटी हुई है। पार्क में बनाया गया पक्का तालाब में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले टूट गए है। सफाई न होने के कारण झूलों के आस-पास बड़ी-बड़ी घास उग आई है।
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ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की ओर से घूमने के लिए सोनीपत रोड पर नंदन कानन पार्क का निर्माण कराया गया था। पार्क की भव्यता के लिए पार्क में फव्वारे लगाए गए और कैंटीन का निर्माण कराया गया था। मगर, रख-रखाव के अभाव में पार्क बदहाल हो गया। बाउंड्री टूटी और झूले टूट गए है। पार्क के गेट पर शहीदों के शिलापट झाड़ियों में छिप गए है। गंदगी के कारण लोग पार्क में जाने से परहेज करते है। डीएम राजकमल यादव ने अधिकारियों को पार्क की सफाई कराने, बाउंड्री और झूलों को ठीक कराने के निर्देश दिए। इसके बाद पार्क की सफाई शुरू हो गई।
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2005 में हुआ था उद्घाटन
पार्क का उद्घाटन 24 सिंतबर 2005 को तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन एवं ग्रामीण अभियंत्रण मंत्री नवाब कोकब हमीद ने किया था। कुछ दिन लोग पार्क में घूमने भी पहुंचे। मगर, बाद में देखरेख के अभाव में इस पार्क की हालत खराब होती चली गई।
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झाड़ियों में छिप गए शिलापट
गेट पर एक ओर पार्क का नाम तथा दूसरी ओर बागपत के वीर सपूतों के नाम की शिलापट लगाई गई थी। गेट पर दोनों और बड़ी झाड़ियां होने के कारण शिलापट पर शहीदों के नाम और पार्क का नाम दिखाई नहीं देता है। अब यहां असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बना रहता है।
बाउंड्री हो गई जर्जर, झूले टूटे
रख-रखाव के अभाव में पार्क की बाउंड्री जर्जर होने लगी है। पार्क के दूसरी ओर की दीवार टूटी हुई है। पार्क में बनाया गया पक्का तालाब में बड़ी-बड़ी घास उग आई है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले टूट गए है। सफाई न होने के कारण झूलों के आस-पास बड़ी-बड़ी घास उग आई है।