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Baghpat News: मां की बिंदी लगती अच्छी, फिर हिंदी क्यों नहीं लगती है
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फोटो केएआर 3
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। मोहल्ला रामपुर में लोक साहित्य संस्कृति समिति के कार्यालय पर शुक्रवार को काव्य गोष्ठी हुई, जिसका शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया गया। गोष्ठी में कवियों ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।
कवि गजेंद्र कौशिक गजानन ने कहा कि लोक भाषा की मीठी बोली सुनने को नहीं मिलती है, मां की बिंदी लगती अच्छी, फिर हिंदी क्यों नहीं लगती है। कवि कश्यप राजेश राज ने कहा कि जीवन की परिभाषा हिंदी, जन-जन की है भाषा हिंदी, हिंदी राष्ट्र की भाषा हिंदी, मन की है जिज्ञासा हिंदी। कवि वैशाली कौशिक ने कहा कि ध्यान से सुनना राज गहरा है, मैं धीरे बोल रही हूं, कानो से नहीं दिल से सुनना मैं हिंदी बोल रही हूं। कवि डीपी मिश्रा ने कहा कि सद्भावना और प्यार मिले, हिंदी को सम्मान मिले। धर्मवीर शास्त्री, शरद शर्मा, नागेंद्र द्विवेदी, अमित चौहान, लोकेश वर्मा, मदन मोहन वशिष्ट, वीएन त्रिपाठी, अवनीश कुमार, सुरेंद्र त्यागी आदि श्रोता मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। मोहल्ला रामपुर में लोक साहित्य संस्कृति समिति के कार्यालय पर शुक्रवार को काव्य गोष्ठी हुई, जिसका शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया गया। गोष्ठी में कवियों ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।
कवि गजेंद्र कौशिक गजानन ने कहा कि लोक भाषा की मीठी बोली सुनने को नहीं मिलती है, मां की बिंदी लगती अच्छी, फिर हिंदी क्यों नहीं लगती है। कवि कश्यप राजेश राज ने कहा कि जीवन की परिभाषा हिंदी, जन-जन की है भाषा हिंदी, हिंदी राष्ट्र की भाषा हिंदी, मन की है जिज्ञासा हिंदी। कवि वैशाली कौशिक ने कहा कि ध्यान से सुनना राज गहरा है, मैं धीरे बोल रही हूं, कानो से नहीं दिल से सुनना मैं हिंदी बोल रही हूं। कवि डीपी मिश्रा ने कहा कि सद्भावना और प्यार मिले, हिंदी को सम्मान मिले। धर्मवीर शास्त्री, शरद शर्मा, नागेंद्र द्विवेदी, अमित चौहान, लोकेश वर्मा, मदन मोहन वशिष्ट, वीएन त्रिपाठी, अवनीश कुमार, सुरेंद्र त्यागी आदि श्रोता मौजूद रहे।
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