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आखिरी बार बहन की सूरत नहीं देख पाया मईनुद्दीन
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बागपत। एक तरफ लॉकडाउन की जद्दोजहद और दूसरी ओर बहन को खोने का गम। मेरठ के युवक मईनुद्दीन की बहन का इंतकाल तीन दिन पहले हुआ। परिवहन सेवाएं बंद थी। युवक अपने परिवार के गम में शामिल होने के लिए जयपुर से पैदल ही निकल पड़ा। अभी वह बागपत तक पहुंचा है। कहता है कि हमेशा दुख रहेगा कि बहन की आखिरी बार सूरत तक नहीं देख पाया।
मेरठ के लक्खीपुरा निवासी मईनुदीन (19) दिल्ली रोड के स्क्रीनिंग कैंप में ठहरा है। सवाल पूछा कि कहां से आए तो दर्द छलक उठा। युवक ने बताया कि वह जयपुर की एक फैक्ट्री में काम करता था। लॉकडाउन हुआ तो पहले दिन वहीं रूक गया। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। घर से कॉल आई कि बहन का इंतकाल हो गया। वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में चला तो काफिला मिला। लोग पैदल ही घरों की तरफ चले जा रहे हैं। सोमवार को बागपत पहुंचा तो अधिकारी स्क्रीनिंग कैंप में ले आए। यहां आराम किया, लेकिन मन घर में बसा है। उसे ताउम्र यह मलाल रहेगा कि आखिरी बार अपनी बहन की सूरत तक नहीं देख सका।
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मेरठ के लक्खीपुरा निवासी मईनुदीन (19) दिल्ली रोड के स्क्रीनिंग कैंप में ठहरा है। सवाल पूछा कि कहां से आए तो दर्द छलक उठा। युवक ने बताया कि वह जयपुर की एक फैक्ट्री में काम करता था। लॉकडाउन हुआ तो पहले दिन वहीं रूक गया। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। घर से कॉल आई कि बहन का इंतकाल हो गया। वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में चला तो काफिला मिला। लोग पैदल ही घरों की तरफ चले जा रहे हैं। सोमवार को बागपत पहुंचा तो अधिकारी स्क्रीनिंग कैंप में ले आए। यहां आराम किया, लेकिन मन घर में बसा है। उसे ताउम्र यह मलाल रहेगा कि आखिरी बार अपनी बहन की सूरत तक नहीं देख सका।
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