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भलाई और त्याग से ही मनुष्य का उत्थान संभव : सुबल सागर
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फोटो नंबर 08 केएआर 1
संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर बड़ागांव में विराजमान अचार्य सुबल सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि मनुष्य को मोह माया, लोभ लालच का त्याग कर अपने आपको भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए। त्याग करना बहुत बड़ा कार्य है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना हल्का होगा, उतना ही ऊपर उठेगा। मनुष्य में जितना अधिक भार होगा, वह उतना ही नीचे जाएगा। मनुष्य को सिर्फ धन दौलत का ही नहीं बुरेे विचारों का भी त्याग करना चाहिए। भगवान महावीर ने कहा था कि हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी सोचें। दूसरों की भलाई, त्याग, समाज और राष्ट्र हित में कार्य करने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। इस दौरान त्रिलोक जैन, महेंद्र जैन, राजीव जैन, प्रदीप जैन, संजीव जैन, मनोज जैन, राजेश जैन, विकास जैन मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खेकड़ा। त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर बड़ागांव में विराजमान अचार्य सुबल सागर महाराज ने धर्म सभा में कहा कि मनुष्य को मोह माया, लोभ लालच का त्याग कर अपने आपको भगवान की भक्ति में लगाना चाहिए। त्याग करना बहुत बड़ा कार्य है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जितना हल्का होगा, उतना ही ऊपर उठेगा। मनुष्य में जितना अधिक भार होगा, वह उतना ही नीचे जाएगा। मनुष्य को सिर्फ धन दौलत का ही नहीं बुरेे विचारों का भी त्याग करना चाहिए। भगवान महावीर ने कहा था कि हम सिर्फ अपने लिए ही नहीं, दूसरों के लिए भी सोचें। दूसरों की भलाई, त्याग, समाज और राष्ट्र हित में कार्य करने से ही मनुष्य का कल्याण संभव है। इस दौरान त्रिलोक जैन, महेंद्र जैन, राजीव जैन, प्रदीप जैन, संजीव जैन, मनोज जैन, राजेश जैन, विकास जैन मौजूद रहे।
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