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देखभाल कर जलाएं आतिशबाजी, प्रकाश के त्योहार में कही छा न जाए अंधेरा
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80 डेसीबल से अधिक आवाज कर सकती बहरा, बाजार में तेज धमाकों के पटाखों की भरमार
हरित दीवाली बनाएं, कम आवाज के पटाखे छोड़े और स्वस्थ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दीपावली का त्योहार खुशियों और प्रकाश का त्योहार हैं। इस त्योहार पर देखभाल कर हल्की आवाज की आतिशबाजी करें। तेज आवाज और धमाकों वाली आतिशबाजी आपके और अपने जीवन में अंधेरा कर सकती है। अचानक कान के पास 80 डेसीबल से अधिक ध्वनि होने पर कान का परदा फट सकता है। आतिशबाजी के दौरान चिंगारी आंखों में जाने पर आंखों की रोशनी जा सकती है। ऐसे में सावधानी पूर्वक खुशियों का त्योहार मनाएं और स्वस्थ रहे।
दीपावली के त्योहार पर खूब आतिशबाजी होती है। बच्चों, युवा, महिला, बड़े सभी इसमें शामिल रहते हैं। बाजार में तेज आवाज वाले पटाखों की भरमार हैं। आतिशबाजी के दौरान थोड़ी सी असावधानी अथवा लापरवाही से बड़ा हादसा हो जाता है। कुछ झुलस जाते हैं और कई बार आंख की रोशनी भी चली जाती हैं। कान के पास अचानक से 80 डेसीबल तक की आवाज होने पर अस्थाई बहरापन और तेज दर्द हो सकता है। इससे अचानक कान के पास इससे अधिक आवाज होने पर कान का परदा भी फट सकता है। साथ ही अस्थाई, स्थायी बहरापन हो सकता है। ऐसे में सावधानीपूर्वक आतिशबाजी करें।
ध्वनि तीव्रता (डेसीबल में) प्रभाव:
40 कानों के लिए आराम दायक
60 कानों में हल्की चुभन
80 तेज दर्द, अस्थायी बहरापन
100 असहनीय दर्द के साथ अस्थाई कान का परदा भी फट सकता है
120 कान का परदा फटना, स्थायी बहरापन
नोट: ध्वनि की गति डेसीबल में हैं।
यह बरतें सावधानी:
कम आवाज की आतिशबाजी छोड़े।
खुले स्थान अथवा मैदान में आतिशबाजी करें।
बच्चों को आतिशबाजी से दूर रखें, अपनी देखरेख में बच्चों से छोटे पटाखे छुड़वाएं।
आंखों को बचाकर रखे, दूर से आतिशबाजी देखें।
आंखों में आतिशबाजी की चिंगारी पहुंचने, कानों में पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
इनसेट
खुले में कम आवाज वाली आतिशबाजी करें। किसी भी तरह की पीड़ा महसूस होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। आंखों को खास तौर से बचाकर रखें। 80 डेसीबल से अधिक आवाज अचानक कानों के पास होने पर कानों का परदा भी फट सकता है। अस्थायी अथवा स्थायी बहरापन भी हो सकता है। डॉ. विजय कुमार, अधीक्षक सीएचसी।
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हरित दीवाली बनाएं, कम आवाज के पटाखे छोड़े और स्वस्थ रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दीपावली का त्योहार खुशियों और प्रकाश का त्योहार हैं। इस त्योहार पर देखभाल कर हल्की आवाज की आतिशबाजी करें। तेज आवाज और धमाकों वाली आतिशबाजी आपके और अपने जीवन में अंधेरा कर सकती है। अचानक कान के पास 80 डेसीबल से अधिक ध्वनि होने पर कान का परदा फट सकता है। आतिशबाजी के दौरान चिंगारी आंखों में जाने पर आंखों की रोशनी जा सकती है। ऐसे में सावधानी पूर्वक खुशियों का त्योहार मनाएं और स्वस्थ रहे।
दीपावली के त्योहार पर खूब आतिशबाजी होती है। बच्चों, युवा, महिला, बड़े सभी इसमें शामिल रहते हैं। बाजार में तेज आवाज वाले पटाखों की भरमार हैं। आतिशबाजी के दौरान थोड़ी सी असावधानी अथवा लापरवाही से बड़ा हादसा हो जाता है। कुछ झुलस जाते हैं और कई बार आंख की रोशनी भी चली जाती हैं। कान के पास अचानक से 80 डेसीबल तक की आवाज होने पर अस्थाई बहरापन और तेज दर्द हो सकता है। इससे अचानक कान के पास इससे अधिक आवाज होने पर कान का परदा भी फट सकता है। साथ ही अस्थाई, स्थायी बहरापन हो सकता है। ऐसे में सावधानीपूर्वक आतिशबाजी करें।
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ध्वनि तीव्रता (डेसीबल में) प्रभाव:
40 कानों के लिए आराम दायक
60 कानों में हल्की चुभन
80 तेज दर्द, अस्थायी बहरापन
100 असहनीय दर्द के साथ अस्थाई कान का परदा भी फट सकता है
120 कान का परदा फटना, स्थायी बहरापन
नोट: ध्वनि की गति डेसीबल में हैं।
यह बरतें सावधानी:
कम आवाज की आतिशबाजी छोड़े।
खुले स्थान अथवा मैदान में आतिशबाजी करें।
बच्चों को आतिशबाजी से दूर रखें, अपनी देखरेख में बच्चों से छोटे पटाखे छुड़वाएं।
आंखों को बचाकर रखे, दूर से आतिशबाजी देखें।
आंखों में आतिशबाजी की चिंगारी पहुंचने, कानों में पीड़ा होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
इनसेट
खुले में कम आवाज वाली आतिशबाजी करें। किसी भी तरह की पीड़ा महसूस होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। आंखों को खास तौर से बचाकर रखें। 80 डेसीबल से अधिक आवाज अचानक कानों के पास होने पर कानों का परदा भी फट सकता है। अस्थायी अथवा स्थायी बहरापन भी हो सकता है। डॉ. विजय कुमार, अधीक्षक सीएचसी।
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