{"_id":"5d8674088ebc3e93ab3b7ce4","slug":"life-became-easier-for-ayushman-for-him-baghpat-news-mrt444588634","type":"story","status":"publish","title_hn":"इनके लिए आयुष्मान से जिंदगी हुई आसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इनके लिए आयुष्मान से जिंदगी हुई आसान
विज्ञापन
जिला अस्पताल में आयुष्मान भारत के लाभार्थी का ऑपरेशन करते चिकित्सक का फाइल फोटो
- फोटो : BAGHPAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागपत। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से लाभ लेने वाले परिवारों की खुशी का ठिकाना नहीं है। आर्थिक तौर पर कमजोर होने के कारण वे लंबे समय से बीमारियां झेल रहे थे। लेकिन गोल्डन कार्ड से उपचार मिलने के बाद उनकी जिंदगी फिर से पटरी पर लौटती दिख रही है। अब तक 30 हजार लोगाें के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं, लेकिन 1522 लोगों ने इसका लाभ लिया है।
जोनमाना गांव के पिंकू का घुटना खराब था। चलने में दिक्कत थी। आर्थिक परेशानी के चलते लाचार परिजन भी इलाज नहीं करा पा रहे थे, लेकिन गोल्डन कार्ड से लाभ मिला। डॉक्टरों ने घुटना प्रत्यारोपण कर दिया, जिससे पिंकू की जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। वह कहता है कि अगर गोल्डन कार्ड नहीं होता तो उसका इलाज नहीं हो पाता।
पुसार गांव की सीमा के घुटने में दिक्कत थी। इलाज के लिए इधर-उधर घूमते रहे। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। डॉक्टरों ने आपरेशन बताया, लेकिन घर में रुपये नहीं थे। ऐसे में गोल्डन कार्ड काम आया। सीमा का घुटना प्रत्यारोपण किया गया।
विज्ञापन
राधा की कोहनी की एल्बो टूट गई थी। आयुष्मान योजना से ऑपरेशन कराया। वह कहती हैं कि परिजनों के पास उपचार के रुपये नहीं थे, लेकिन गोल्डन कार्ड से उन्हें आसानी हो गई। इसी तरह दिव्यांग मिजरा और पुसार गांव की ही सुमन का उपचार भी आयुष्मान योजना में हो चुका है।
इन बीमारियों का अब तक इलाज
सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि गंभीर बीमारियों में अब तक कूल्हा प्रत्यारोपण, घुटना प्रत्यारोपण, स्पाइनल सर्जरी, बच्चेदानी का ऑप्रेशन, हार्निया का ऑप्रेशन, पित्त की थैली का ऑप्रेशन और डायलिसिस कराया गया है।
प्लास्टिक कार्ड से बनेगा गोल्डन कार्ड
आयुष्मान के प्रभारी डॉ कपिल सरोहा का कहना है कि लोगों के घर प्लास्टिक का कार्ड पहुंच रहा है। कुछ लोग इसे ही गोल्डन कार्ड समझ लेते हैं जबकि इस कार्ड से ही गोल्डन कार्ड बनेंगा। प्लास्टिक कार्ड से उपचार नहीं मिलेगा।
विज्ञापन
जोनमाना गांव के पिंकू का घुटना खराब था। चलने में दिक्कत थी। आर्थिक परेशानी के चलते लाचार परिजन भी इलाज नहीं करा पा रहे थे, लेकिन गोल्डन कार्ड से लाभ मिला। डॉक्टरों ने घुटना प्रत्यारोपण कर दिया, जिससे पिंकू की जिंदगी पटरी पर लौटने लगी है। वह कहता है कि अगर गोल्डन कार्ड नहीं होता तो उसका इलाज नहीं हो पाता।
विज्ञापन
पुसार गांव की सीमा के घुटने में दिक्कत थी। इलाज के लिए इधर-उधर घूमते रहे। लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। डॉक्टरों ने आपरेशन बताया, लेकिन घर में रुपये नहीं थे। ऐसे में गोल्डन कार्ड काम आया। सीमा का घुटना प्रत्यारोपण किया गया।
विज्ञापन
राधा की कोहनी की एल्बो टूट गई थी। आयुष्मान योजना से ऑपरेशन कराया। वह कहती हैं कि परिजनों के पास उपचार के रुपये नहीं थे, लेकिन गोल्डन कार्ड से उन्हें आसानी हो गई। इसी तरह दिव्यांग मिजरा और पुसार गांव की ही सुमन का उपचार भी आयुष्मान योजना में हो चुका है।
इन बीमारियों का अब तक इलाज
सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने बताया कि गंभीर बीमारियों में अब तक कूल्हा प्रत्यारोपण, घुटना प्रत्यारोपण, स्पाइनल सर्जरी, बच्चेदानी का ऑप्रेशन, हार्निया का ऑप्रेशन, पित्त की थैली का ऑप्रेशन और डायलिसिस कराया गया है।
प्लास्टिक कार्ड से बनेगा गोल्डन कार्ड
आयुष्मान के प्रभारी डॉ कपिल सरोहा का कहना है कि लोगों के घर प्लास्टिक का कार्ड पहुंच रहा है। कुछ लोग इसे ही गोल्डन कार्ड समझ लेते हैं जबकि इस कार्ड से ही गोल्डन कार्ड बनेंगा। प्लास्टिक कार्ड से उपचार नहीं मिलेगा।