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यज्ञ में आहुति देने वाला होता है सौभाग्यशाली

Mon, 27 Jan 2020 10:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jan 2020 10:39 PM IST
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It is fortunate to be sacrificed in yagya
यज्ञ में आहुति देने वाला होता है सौभाग्यशाली
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बिनौली। जिवाना गुलियान के नीलकंठ आश्रम में चल रहे सात दिवसीय ऋग्वेद पारायण महायज्ञ के चौथे दिन सोमवार को सिद्धगुरु महाराज ने प्रवचन में कहा कि यज्ञ कर्म कई शुभ कर्म करने के बाद मिलता है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में पाप कर्म से बचना चाहिए। अधिक से अधिक श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। जो भक्तजन यज्ञ में आहुति प्रदान कर रहे हैं वह सौभाग्यशाली हैं। उन्होंने कहा कि गुरुसेवा बड़े पुण्य कर्मों से मिलती है। ऐसे ही यज्ञ कर्म भी बहुत शुभ कर्मों के उपरांत करने को मिल पाता है। आचार्य चंद्रमणि याज्ञनिक ने कहा कि धर्म मनुष्य को जोड़ता है। वेद धर्म का मूल है। वेद किसी धर्म जाति का नही वरन प्राणिमात्र का है। लाक्षागृह गुरुकुल बरनावा के आचार्य अंकुर भारद्वाज व अमित शास्त्री ने सस्वर वेदपाठ के साथ ईश भक्ति से ओतप्रोत सुमधुर भजन प्रस्तुत किये। अश्वनी कुमार सिन्हा सपत्नीक यज्ञमान रहे।
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