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इंडियन जर्नल आफ आर्कियोलॉजी में पढ़े सिनौली का इतिहास

Fri, 27 May 2022 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 27 May 2022 11:51 PM IST
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History of Sinouli read in Indian Journal of Archeology
संवाद न्यूज एजेंसी
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बड़ौत (बागपत)। पांच हजार साल पुरानी सभ्यता के प्रमाण मिलने के बाद सुर्खियों में आया सिनौली गांव पर अब शोध पत्रिका इंडियन जर्नल आफ आर्कियोलॉजी में लेख प्रकाशित हुआ है। शोधार्थी विजय कुमार के इस लेख में एएसआई टीम में शामिल रहे संजय मंजुल, अरविन मंजुल और उनकी टीम की ओर से की गई खोदाई में मिले पुरावशेषों का क्रमबद्ध विवरण दिया गया।
बता दें कि सिनौली साइट पर मानव बस्ती, ईंटों की दीवार, शाही ताबूत, युद्ध रथ, मिट्टी की भट्टी, धनुष, मृदभाष, तांबे की तलवार और कंकाल मिले थे। पत्रिका में सिनौली साइट पर शोधपरक लेख प्रकाशित होने के बाद अब साइट से मिले पुरावशेषों की न सिर्फ आधिकारिक पुष्टि हुई है, बल्कि शोध की अन्य संभावनाओं के रास्ते भी खुल गए हैं। इस संबंध में एएसआई लाल किला संस्थान के निर्देशक के संजय मुंजल ने बताया कि सिनौली साइट पर अब तक दर्जनों राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, शोध पत्र, डाक्यूमेंट्री आ चुकी है। हाल ही में छोटे पर्दे पर ‘सिक्रेट्स ऑफ सिनौली : डिस्कवरी और सेन्च्यूरी’ नाम से डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई थी। इसमें विख्यात अभिनेता मनोज वाजपेयी ने सिनौली के पुरावशेषों पर प्रकाश डाला था। इसी क्रम में डा. विजय कुमार का भी शोध पत्र प्रकाशित हुआ है।
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प्राचीन शिवालय में निकली थी अष्टभुजा शिवलिंग
करीब पांच हजार साल का इतिहास अपने गर्भ में समेटने वाली सिनौली साइट से मात्र 500 मीटर दूर अति प्राचीन शिवालय में अष्टभुजा शिवलिंग मिला था। ग्रामीणों ने इसकी जांच के लिए भी एएसआई से निवेदन किया था।
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2005 मेें प्रथम चरण की हुई थी खोदाई
वर्ष 2005 में सिनौली में वरिष्ठ पुरातत्वविद डॉ. डीवी शर्मा के निर्देशन में एएसआई की टीम ने प्रथम चरण की खोदाई कराई थी। 177 मानव कंकाल, सोने के कंगन, मनके, तांबे की तलवार के साथ-साथ एक विशाल शवाधान केंद्र की पुष्टि हुई थी। इसके उपरांत 15 फरवरी 2018 को सिनौली साइट पर एएसआई लालकिला संस्थान के निदेशक डॉ. संजय मंजुल के निर्देशन में लगभग साढ़े तीन माह तक उत्खनन हुआ था। आठ मानव कंकाल, तीन तलवारें, काफी संख्या में मृदभांड, विभिन्न दुर्लभ पत्थरों के मनके, सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राप्ति के रूप मेें पांच हजार साल प्राचीन मानव योद्धाओं के तांबे से सुसज्जित तीन ताबूत, तीन रथ प्राप्त हुए थे।
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