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Baghpat News: टैटू बनवाकर एचआईवी संक्रमित हो गए युवा
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बागपत। बागपत के रहने वाले एक युवक ने दिल्ली में अप्रैल महीने में अपने हाथ पर फूल का टैटू बनवाकर नाम भी लिखवाया था। टैटू बनाते हुए हाथ से खून भी निकल गया था। टैटू बनवाने के तीन महीने बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी। दवाई लेने के बाद भी बुखार ठीक नहीं हुआ तो खून की जांच कराई। उसकी रिपोर्ट आने के बाद चिकित्सक को दिखाई तो उन्होंने आशंका होने पर एचआईवी जांच कराई। उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई तो पता चला कि टैटू बनवाने के कारण ऐसा हुआ है।
इस तरह टैटू बनवाने का शौक युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। वह हाथ और गर्दन पर टैटू पैसे देकर बनवा रहे हैं और एचआईवी उनको फ्री में मिल रहा है। यहां इस तरह के चार मामले सामने आए हैं, जिनको देखकर चिकित्सक भी चौंक रहे हैं। टैटू बनवाते समय युवा सुई नहीं बदलवाते हैं और दुकानदार अपना खर्च बचाने के लिए लापरवाही दिखाते हुए युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं।
टैटू बनाने के लिए मशीन के आगे जिस सुई का इस्तेमाल किया जाता है, वह 500-1200 रुपये की आती है। वहीं चौराहों पर 200-500 रुपये में टैटू बना दिया जाता है। एक सुई का बार-बार इस्तेमाल संक्रमण की बड़ी वजह है। इसलिए ही चिकित्सकों ने एडवाइजरी जारी कर दी है कि कोई टैटू बनवाता है तो वह दुकानदार से नई सुई का इस्तेमाल कराए। इसके साथ ही किसी लड़की के कान छिदवाने के लिए भी नई सुई का इस्तेमाल ही कराया जाए। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. ऐश्वर्या चौधरी बताती हैं कि टैटू बनवाने पर एचआईवी संक्रमित होने के कई मामले आए हैं। उनका उपचार चल रहा है।
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नौ माह में सबसे अधिक महिलाओं को हुआ एचआईवी
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. ऐश्वर्या चौधरी ने बताया कि जिले में एचआईवी के एक्टिव 307 मरीज हैं, जिसमें महिला 144 व पुरुष 163 हैं। उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी माह में सितंबर तक महिला अस्पताल में 6400 महिलाओं की एचआईवी जांच कराई गई। इनमें 32 महिलाओं को एचआईवी की पुष्टि हुई। जिला अस्पताल में 6400 पुरुषों की जांच कराई गई तो इनमें 21 पुरुषों को एचआईवी मिला। इनमें सबसे अधिक 18 से 30 साल के उम्र के युवक शामिल हैं।
इस तरह करें एचआईवी की पहचान
एचआईवी संक्रमण की सही पहचान केवल रक्त परीक्षण से ही संभव है, क्योंकि इसके लक्षण अन्य बीमारियों जैसे ही हो सकते हैं। असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या प्रसव के दौरान संक्रमण होने पर जोखिम होता है। शुरुआती लक्षणों में बुखार, गले में खराश, थकान, रात में पसीना आना या त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं।
बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं
डॉ. ऐश्वर्या चौधरी ने बताया कि महिला को एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) सेंटर भेजा जाता है। उनका कहना है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है और रोगी को जीवन भर बेहद सतर्कता के साथ दवाएं लेनी पड़ती हैं। साथ ही संक्रमण मिलने के बाद परिजनों को भी भेदभाव न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे संक्रमित व्यक्ति का हौसला टूट जाता है।
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इस तरह टैटू बनवाने का शौक युवाओं की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। वह हाथ और गर्दन पर टैटू पैसे देकर बनवा रहे हैं और एचआईवी उनको फ्री में मिल रहा है। यहां इस तरह के चार मामले सामने आए हैं, जिनको देखकर चिकित्सक भी चौंक रहे हैं। टैटू बनवाते समय युवा सुई नहीं बदलवाते हैं और दुकानदार अपना खर्च बचाने के लिए लापरवाही दिखाते हुए युवाओं की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं।
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टैटू बनाने के लिए मशीन के आगे जिस सुई का इस्तेमाल किया जाता है, वह 500-1200 रुपये की आती है। वहीं चौराहों पर 200-500 रुपये में टैटू बना दिया जाता है। एक सुई का बार-बार इस्तेमाल संक्रमण की बड़ी वजह है। इसलिए ही चिकित्सकों ने एडवाइजरी जारी कर दी है कि कोई टैटू बनवाता है तो वह दुकानदार से नई सुई का इस्तेमाल कराए। इसके साथ ही किसी लड़की के कान छिदवाने के लिए भी नई सुई का इस्तेमाल ही कराया जाए। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. ऐश्वर्या चौधरी बताती हैं कि टैटू बनवाने पर एचआईवी संक्रमित होने के कई मामले आए हैं। उनका उपचार चल रहा है।
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नौ माह में सबसे अधिक महिलाओं को हुआ एचआईवी
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. ऐश्वर्या चौधरी ने बताया कि जिले में एचआईवी के एक्टिव 307 मरीज हैं, जिसमें महिला 144 व पुरुष 163 हैं। उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी माह में सितंबर तक महिला अस्पताल में 6400 महिलाओं की एचआईवी जांच कराई गई। इनमें 32 महिलाओं को एचआईवी की पुष्टि हुई। जिला अस्पताल में 6400 पुरुषों की जांच कराई गई तो इनमें 21 पुरुषों को एचआईवी मिला। इनमें सबसे अधिक 18 से 30 साल के उम्र के युवक शामिल हैं।
इस तरह करें एचआईवी की पहचान
एचआईवी संक्रमण की सही पहचान केवल रक्त परीक्षण से ही संभव है, क्योंकि इसके लक्षण अन्य बीमारियों जैसे ही हो सकते हैं। असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या प्रसव के दौरान संक्रमण होने पर जोखिम होता है। शुरुआती लक्षणों में बुखार, गले में खराश, थकान, रात में पसीना आना या त्वचा पर चकत्ते हो सकते हैं।
बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं
डॉ. ऐश्वर्या चौधरी ने बताया कि महिला को एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) सेंटर भेजा जाता है। उनका कहना है कि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है और रोगी को जीवन भर बेहद सतर्कता के साथ दवाएं लेनी पड़ती हैं। साथ ही संक्रमण मिलने के बाद परिजनों को भी भेदभाव न करने की सलाह दी जाती है क्योंकि इससे संक्रमित व्यक्ति का हौसला टूट जाता है।