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Baghpat News: गुरु जहाज की तरह होते हैं, जो शिष्य को भव-समुद्र से पार लगाते हैं
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गुरुभक्ति से मुक्ति- आचार्य विशुद्ध सागरफोटो संख्या 1
बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि जो गुरु सन्निधि में रहता है, गुरु आज्ञा का पालन करता है, जो गुरु उपदेशों के अनुसार जीवन जीता है, उस शिष्य को विद्यायें सिद्ध हो जाती हैं। गुरु एवं शिष्य का श्रधा-श्रद्धेय सम्बंध होता है। गुरु जहाज की तरह होते हैं, जो शिष्य को भव-समुद्र से पार लगाते हैं।
आचार्य विशुद्ध महाराज मंगलवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संसार में कल्याण का उपदेश देने वाले गुरु ही एक शरणभूत हैं। प्रभु की पवित्र वाणी (दिव्य-ध्वनि) सुनकर भव्य-जीव वैराग्य प्राप्त कर, आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलते हैं। जिसे आत्म कल्याण करना है, उसे जगत के प्रपंचों से दूर रहना चाहिए। भजन एवं भोजन के समय व्यक्ति को अपना चित्त प्रसन्न रखना चाहिए। भोजन और भजन के समय उत्साह, उमंग होना चाहिए। भोजन स्वादिष्ट, मधुर, पौष्टिक, सुन्दर और उत्साह बढ़ाने वाला होना चाहिए। जैसा भोजन होगा, वैसा ही चित्त, चर्चा एवं चर्या होगी। भोजन से प्राणों की रक्षा होती है। कहा कि घर में कूड़ा-कचरा भरकर मत रखो, ऐसे ही चित्त को कषायों से मलिन मत करो। शिक्षा प्राप्त करो, शिक्षित बनो और शिक्षकों का सम्मान करो। सोच को पवित्र करो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में अतुल जैन, मनोज जैन, शुभम जैन, पुनीत जैन, अशोक जैन आदि उपस्थित थे। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया की आचार्य विशुद्ध सागर महाराज का रविवार 10 सितंबर को मंगल प्रवचन लोहिया बाजार में, जैन मिलन बड़ौत के सौजन्य से होगा। इसके अतिरिक्त 11 सितंबर से 15 सितंबर तक आचार्य श्री का मंगल प्रवचन शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कैनाल रोड पर होगा।
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बड़ौत। दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्धसागर महाराज ने कहा कि जो गुरु सन्निधि में रहता है, गुरु आज्ञा का पालन करता है, जो गुरु उपदेशों के अनुसार जीवन जीता है, उस शिष्य को विद्यायें सिद्ध हो जाती हैं। गुरु एवं शिष्य का श्रधा-श्रद्धेय सम्बंध होता है। गुरु जहाज की तरह होते हैं, जो शिष्य को भव-समुद्र से पार लगाते हैं।
आचार्य विशुद्ध महाराज मंगलवार को ऋषभदेव सभागार में आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संसार में कल्याण का उपदेश देने वाले गुरु ही एक शरणभूत हैं। प्रभु की पवित्र वाणी (दिव्य-ध्वनि) सुनकर भव्य-जीव वैराग्य प्राप्त कर, आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलते हैं। जिसे आत्म कल्याण करना है, उसे जगत के प्रपंचों से दूर रहना चाहिए। भजन एवं भोजन के समय व्यक्ति को अपना चित्त प्रसन्न रखना चाहिए। भोजन और भजन के समय उत्साह, उमंग होना चाहिए। भोजन स्वादिष्ट, मधुर, पौष्टिक, सुन्दर और उत्साह बढ़ाने वाला होना चाहिए। जैसा भोजन होगा, वैसा ही चित्त, चर्चा एवं चर्या होगी। भोजन से प्राणों की रक्षा होती है। कहा कि घर में कूड़ा-कचरा भरकर मत रखो, ऐसे ही चित्त को कषायों से मलिन मत करो। शिक्षा प्राप्त करो, शिक्षित बनो और शिक्षकों का सम्मान करो। सोच को पवित्र करो। सभा का संचालन पंडित श्रेयांस जैन ने किया। सभा में अतुल जैन, मनोज जैन, शुभम जैन, पुनीत जैन, अशोक जैन आदि उपस्थित थे। मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया की आचार्य विशुद्ध सागर महाराज का रविवार 10 सितंबर को मंगल प्रवचन लोहिया बाजार में, जैन मिलन बड़ौत के सौजन्य से होगा। इसके अतिरिक्त 11 सितंबर से 15 सितंबर तक आचार्य श्री का मंगल प्रवचन शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर कैनाल रोड पर होगा।
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