हरियाली तीज पर ऑनलाइन कोथली, कोरोना ने फीका कर दिया घेवर का स्वाद
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कोथली में घेवर देने की परंपरा है, लेकिन इस बार कोथली लेकर जाने वालों की संख्या कम है। घेवर की मांग कम होने से बाजार भी प्रभावित हुआ है। दुकानदारों का दावा है कि पिछले साल के अपेक्षा इस बार घेवर का बाजार 70 प्रतिशत कम हो गया है।
इस तरह भी पड़ रहा असर
बड़ौत के मुख्य बाजार की अधिकतर दुकानें कंटेनमेंट जाने में आ जाने के कारण हलवाइयों के प्रतिष्ठान भी बंद रहे। यही हाल छपरौली और बागपत नगर का भी है।
खरीदारी से बच रहे लोग
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अधिकांश लोग समान की खरीदारी करने से भी बच रहे हैं। मिठाई की दुकानों पर सबसे कम खरीदारी हो रही है, जिसे दुकानदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सराय के घेवर की दूर तक मांग
अमीनगर सराय के घेवर की दूर तक मांग रहती है। दिल्ली, नोएडा, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में घेवर की सप्लाई की जाती है। विदेश में रहने वाले जिले के लोग भी सराय के घेवर को श्रावण के महीने में मंगाकर स्वाद लेते हैं।
क्या कहते हैं व्यापारी
अमीनगर सराय के व्यापारी ईश्वर दयाल अग्रवाल का कहना है कि कोरेाना संक्रमण ने घेवर के साथ-साथ अन्य मिठाई का बाजार प्रभावित किया है। घेवर का बाजार 70 प्रतिशत प्रभावित हुआ है।
अमीनगर सराय के घेवर विक्रेता गौरी जैन का कहना है कि आवागमन कम है, जिस कारण घेवर की मांग भी घट गई है। बाजार में ग्राहक नहीं है। अधिकांश परिवारों में कोथली भी नहीं जा रही है।
यह है घेवर के दाम
सादे घेवर की कीमत बाजार में 150 से दो सौ रुपये के बीच है, जबकि मावे के घेवर की कीमत 250 से तीन सौ रुपये के बीच है।
सौंदर्य प्रसाधन पर भी कोरोना की मार
सौंदर्य प्रसाधन के विक्रेता दीपक शर्मा का कहना है कि हरियाली तीज नजदीक है, लेकिन कोरोना ने बाजार की रौनक छीन ली है। सौंदर्य प्रसाधन की खरीदारी नहीं हो रही है। कपड़े, चूड़ी खरीदने के लिए महिलाएं नहीं पहुंच रही हैं।
हरियाली तीज पर ऑनलाइन कोथली
कोरोना का असर यह हुआ है कि बहनों के खाते में तीज की कोथली के ऑनलाइन रुपये भेजे जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे पहले ईद पर भी मुस्लिम भाई ने ऑनलाइन ईदी भेजकर नई परंपरा शुरू की थी।