{"_id":"659dac538e700041a20e23a5","slug":"for-the-first-time-two-players-from-baghpat-will-shoot-in-the-same-olympics-baghpat-news-c-28-1-smrt1010-8875-2024-01-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Baghpat News: पहली बार एक ही ओलंपिक में निशाना साधेंगे बागपत के दो खिलाड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Baghpat News: पहली बार एक ही ओलंपिक में निशाना साधेंगे बागपत के दो खिलाड़ी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंकित चौहान
बागपत। छोटे जिलों में शामिल बागपत अब बड़े इतिहास रच रहा है। यहां के दो खिलाड़ी पहली बार एक ही ओलंपिक में निशाना साधेंगे, जिनमें एक अंगदपुर के अखिल श्योराण और दूसरे गढ़ी कांगरान के वरुण तोमर हैं। यहां से अभी तक केवल तीन पहलवान ही ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर सके हैं। ऐसे में दो शूटरों का ओलंपिक कोटा हासिल करना बड़ी उपलब्धि है।
अंगदपुर गांव के रहने वाले किसान रविंद्र के बेटे अखिल श्योराण ने अजरबैजान में पिछले साल आईएसएसएफ विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश को पांचवां ओलंपिक कोटा दिलाया था और बागपत की तरफ से पेरिस ओलंपिक का टिकट कटाया था। अब गढ़ी कांगरान गांव के रहने वाले शिक्षक विशेष कुमार के बेटे वरुण तोमर ने भी जकार्ता में चल रही एशिया ओलंपिक क्वालीफाई चैंपियनशिप में दस मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक का टिकट कटा लिया।
पदक जीतकर करेंगे सपना पूरा
वरुण ने केवल छह साल में ओलंपिक तक का सफर तय किया है। इसके लिए उनको फुफेरे भाई मेरठ के कलीना गांव के सौरभ चौधरी से प्रोत्साहन मिला। वरुण कहते है कि उनका आधा सपना पूरा हो गया है और वह देश के लिए ओलंपिक में मेडल जीतकर सपना पूरा करेंगे। वहीं अखिल श्योराण भी रोज आठ घंटे अभ्यास कर रहे हैं। उनका सपना भी देश को ओलंपिक में मेडल दिलाना है।
विज्ञापन
अभी तक ओलंपिक में बागपत के केवल तीन पहलवानों ने किया प्रतिनिधित्व
बागपत से ओलंपिक में अभी तक मलकपुर गांव के केवल तीन पहलवान ही पहुंच सके हैं। सबसे पहले 1992 में सुभाष तोमर ने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था तो उसके बाद 2008 में राजीव तोमर भी ओलंपिक में पहुंचे थे। बागपत से आखिरी बार वर्ष 2016 में संदीप तोमर ओलंपिक में गए थे। पहलवानों के अलावा यहां से ओलंपिक में अभी तक कोई शूटर या अन्य खेल का खिलाड़ी नहीं पहुंचा है।
विज्ञापन
बागपत। छोटे जिलों में शामिल बागपत अब बड़े इतिहास रच रहा है। यहां के दो खिलाड़ी पहली बार एक ही ओलंपिक में निशाना साधेंगे, जिनमें एक अंगदपुर के अखिल श्योराण और दूसरे गढ़ी कांगरान के वरुण तोमर हैं। यहां से अभी तक केवल तीन पहलवान ही ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर सके हैं। ऐसे में दो शूटरों का ओलंपिक कोटा हासिल करना बड़ी उपलब्धि है।
अंगदपुर गांव के रहने वाले किसान रविंद्र के बेटे अखिल श्योराण ने अजरबैजान में पिछले साल आईएसएसएफ विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश को पांचवां ओलंपिक कोटा दिलाया था और बागपत की तरफ से पेरिस ओलंपिक का टिकट कटाया था। अब गढ़ी कांगरान गांव के रहने वाले शिक्षक विशेष कुमार के बेटे वरुण तोमर ने भी जकार्ता में चल रही एशिया ओलंपिक क्वालीफाई चैंपियनशिप में दस मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतकर पेरिस ओलंपिक का टिकट कटा लिया।
विज्ञापन
पदक जीतकर करेंगे सपना पूरा
वरुण ने केवल छह साल में ओलंपिक तक का सफर तय किया है। इसके लिए उनको फुफेरे भाई मेरठ के कलीना गांव के सौरभ चौधरी से प्रोत्साहन मिला। वरुण कहते है कि उनका आधा सपना पूरा हो गया है और वह देश के लिए ओलंपिक में मेडल जीतकर सपना पूरा करेंगे। वहीं अखिल श्योराण भी रोज आठ घंटे अभ्यास कर रहे हैं। उनका सपना भी देश को ओलंपिक में मेडल दिलाना है।
विज्ञापन
अभी तक ओलंपिक में बागपत के केवल तीन पहलवानों ने किया प्रतिनिधित्व
बागपत से ओलंपिक में अभी तक मलकपुर गांव के केवल तीन पहलवान ही पहुंच सके हैं। सबसे पहले 1992 में सुभाष तोमर ने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था तो उसके बाद 2008 में राजीव तोमर भी ओलंपिक में पहुंचे थे। बागपत से आखिरी बार वर्ष 2016 में संदीप तोमर ओलंपिक में गए थे। पहलवानों के अलावा यहां से ओलंपिक में अभी तक कोई शूटर या अन्य खेल का खिलाड़ी नहीं पहुंचा है।