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असफलता ही वेदना की चेतना को करती है जागरूक
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बागपत। श्री यमुना इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य जयपाल शर्मा ने कहा असफलता वेदना की चेतना को जागरूक करती है। यूपी बोर्ड की परीक्षा में कम अंक आने पर छात्र घबराएं नहीं, बल्कि आगे की तैयारी में जुट जाएं। उन्होंने छात्रों को अपना लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। ऐसे न जाने कितने उदाहरण है, इनमें हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा में कम अंक आने के बावजूद लोग उच्च पदों पर आसीन रहे हैं।
उन्होंने कहा वह एमए अंग्रेजी की परीक्षा उत्तीर्ण कर वर्ष 1980 से 2009 तक नगर के श्री यमुना इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता रहे और जुलाई 2009 से मार्च 2020 तक कॉलेज के प्रधानाचार्य के पद का कार्यभार संभाला। जहां पढ़ाई की बात है तो उन्होंने हाईस्कूल से लेकर एमए तक द्वितीय श्रेणी प्राप्त की। इसके बाद भी समाज को शिक्षित करने का मुकाम हासिल किया। उन्होंने बताया कि उनके कंवर पाल नाम के एक छात्र ने हाईस्कूल की परीक्षा में तृतीय श्रेणी से पास करने के बाद भी अपना धैर्य नहीं खोया। उसने इंटरमीडिएट में द्वितीय श्रेणी प्राप्त की और बीए में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने के बाद यूनिवर्सिटी के कैंपस से अंग्रेजी से एमए की परीक्षा पास कर अपनी उपयोगिता दिखाई। कुंवर पाल ने अपनी प्रतिभा के आधार पर पहले प्राइमरी विद्यालय में नौकरी प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली में और अब वह नोएडा के डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर तैनात है। उनका मानना है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कम अंक आने पर छात्रों को हताश नहीं होना चाहिए, बल्कि नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के प्रयास करने चाहिए। परीक्षा में कम अंक आने से किसी की प्रतिभा को आंकना उसके साथ बेईमानी होगी।
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उन्होंने कहा वह एमए अंग्रेजी की परीक्षा उत्तीर्ण कर वर्ष 1980 से 2009 तक नगर के श्री यमुना इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता रहे और जुलाई 2009 से मार्च 2020 तक कॉलेज के प्रधानाचार्य के पद का कार्यभार संभाला। जहां पढ़ाई की बात है तो उन्होंने हाईस्कूल से लेकर एमए तक द्वितीय श्रेणी प्राप्त की। इसके बाद भी समाज को शिक्षित करने का मुकाम हासिल किया। उन्होंने बताया कि उनके कंवर पाल नाम के एक छात्र ने हाईस्कूल की परीक्षा में तृतीय श्रेणी से पास करने के बाद भी अपना धैर्य नहीं खोया। उसने इंटरमीडिएट में द्वितीय श्रेणी प्राप्त की और बीए में प्रथम श्रेणी प्राप्त करने के बाद यूनिवर्सिटी के कैंपस से अंग्रेजी से एमए की परीक्षा पास कर अपनी उपयोगिता दिखाई। कुंवर पाल ने अपनी प्रतिभा के आधार पर पहले प्राइमरी विद्यालय में नौकरी प्राप्त की। इसके बाद दिल्ली में और अब वह नोएडा के डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर तैनात है। उनका मानना है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में कम अंक आने पर छात्रों को हताश नहीं होना चाहिए, बल्कि नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के प्रयास करने चाहिए। परीक्षा में कम अंक आने से किसी की प्रतिभा को आंकना उसके साथ बेईमानी होगी।
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