{"_id":"5f4e7edb8ebc3e54581988d8","slug":"embraced-the-perfect-celibacy-religion-baraut-news-mrt4990368154","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को अंगीकार किया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को अंगीकार किया
विज्ञापन
दशलक्षण महापर्व का आखिरी दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दशलक्षण महापर्व के आखिरी दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को अंगीकार किया। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर श्रीजी का प्रकक्षालन शांतिधारा और अभिषेक किया गया। 13 द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई और अर्घ्य चढाए गए। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुनील जैन, आलोक जैन शामिल रहे। उधर, श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरु रोड में भी उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पांच पूजा की गई। इसमें सतेन्द्र जैन, अनिल जैन, सुशील जैन, आदिश जैन शामिल रहे।
पंडित डॉ श्रीयांश जैन ने आजर्व धर्म के बारे में बताया। कहा कि ब्रह्मचर्य व्रत ही तीनों लोकों में प्रशंसनीय है, जो कि विशुद्धि को प्राप्त हुए पूज्य पुरुषों द्वारा भी पूजा जाता है। दिगंबर जैन बड़ा जैन मंदिर मेें धर्मसभा में उन्होंने कहा कि बच्चे को सुसंस्कार युक्त और चारित्र निष्ठ बनाने के लिए माता-पिता का जीवन संस्कारित एवं चरित्रनिष्ठ होना आवश्यक है। माता-पिता के जीवन का प्रभाव बच्चे पर पड़े बिना नहीं रहता। परिस्थिति कैसी भी हो, मनोस्थिति सही होनी चाहिए। संतुलित मन स्थिति हर परिस्थिति से उभार लेती है। मानसिक ब्रह्मचर्य की साधना बहुत बड़ी साधना मानी जाती है। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के पालने वाले को मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति अवश्य ही होती है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दशलक्षण महापर्व के आखिरी दिन श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म को अंगीकार किया। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर श्रीजी का प्रकक्षालन शांतिधारा और अभिषेक किया गया। 13 द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई और अर्घ्य चढाए गए। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, सुनील जैन, आलोक जैन शामिल रहे। उधर, श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरु रोड में भी उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की पांच पूजा की गई। इसमें सतेन्द्र जैन, अनिल जैन, सुशील जैन, आदिश जैन शामिल रहे।
पंडित डॉ श्रीयांश जैन ने आजर्व धर्म के बारे में बताया। कहा कि ब्रह्मचर्य व्रत ही तीनों लोकों में प्रशंसनीय है, जो कि विशुद्धि को प्राप्त हुए पूज्य पुरुषों द्वारा भी पूजा जाता है। दिगंबर जैन बड़ा जैन मंदिर मेें धर्मसभा में उन्होंने कहा कि बच्चे को सुसंस्कार युक्त और चारित्र निष्ठ बनाने के लिए माता-पिता का जीवन संस्कारित एवं चरित्रनिष्ठ होना आवश्यक है। माता-पिता के जीवन का प्रभाव बच्चे पर पड़े बिना नहीं रहता। परिस्थिति कैसी भी हो, मनोस्थिति सही होनी चाहिए। संतुलित मन स्थिति हर परिस्थिति से उभार लेती है। मानसिक ब्रह्मचर्य की साधना बहुत बड़ी साधना मानी जाती है। उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के पालने वाले को मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति अवश्य ही होती है।
विज्ञापन