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Baghpat News: चार साल बाद होंगे गन्ना समितियों के चुनाव
Sat, 14 Jan 2023 12:32 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Sat, 14 Jan 2023 12:32 AM IST
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बागपत। उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति निर्वाचन आयोग ने गन्ना समितियों के चुनाव का कार्यक्रम जारी कर दिया है। इससे पहले 2014 में चुनाव हुए थे और 2019 में कार्यकाल पूरा होने के बाद गन्ना समितियों के बोर्ड को भंग कर दिया गया था।
जारी कार्यक्रम के अनुसार गन्ना समितियों के प्रतिनिधियों (डेलीगेट) का चुनाव 21 अप्रैल और प्रबंध समितियों के संचालकों (निदेशकों) का चुनाव 11 मई और सभापति व उपसभापति का चुनाव 12 मई को होगा। इसी दिन अन्य संस्थाओं और सहकारी चीनी समितियों के प्रतिनिधियों का चुनाव भी होगा। जिले में बागपत और मलकपुर दो गन्ना समिति हैं, बागपत और रमाला दो सहकारी चीनी मिल हैं। एक लाख 29 हजार किसान गन्ना समितियों के सदस्य हैं। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही दावेदारों में तैयारी शुरू कर दी है।
योजनाओं से वंचित रह रहे थे किसान
प्रबंध समिति भंग होने के बाद से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है और न ही उन्हें योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है। अधिकारी अपनी मनमर्जी चला रहे है। किसानों को समिति की योजनाओं व सब्सिडी का समय पर लाभ नहीं मिल रहा था। कृष्णपाल सिंह, बागपत गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन
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दूर कराई जाती मिल की खामियां
प्रबंध समिति भंग होने के कारण मिलों में केवल अधिकारियों का हस्तक्षेप रहता है। किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। मिल प्रबंधन की ओर से रमाला मिल का संचालन करने का ठेका एक करोड़ 27 लाख रुपये में दिया गया है। प्रबंध समिति का गठन होने पर मिल का संचालन फेडरेशन की ओर से कराया जाता और कम खर्च में संचालन किया जाता। -रविंद्र मुखिया, रमाला सहकारी मिल के पूर्व उपसभापति
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जारी कार्यक्रम के अनुसार गन्ना समितियों के प्रतिनिधियों (डेलीगेट) का चुनाव 21 अप्रैल और प्रबंध समितियों के संचालकों (निदेशकों) का चुनाव 11 मई और सभापति व उपसभापति का चुनाव 12 मई को होगा। इसी दिन अन्य संस्थाओं और सहकारी चीनी समितियों के प्रतिनिधियों का चुनाव भी होगा। जिले में बागपत और मलकपुर दो गन्ना समिति हैं, बागपत और रमाला दो सहकारी चीनी मिल हैं। एक लाख 29 हजार किसान गन्ना समितियों के सदस्य हैं। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही दावेदारों में तैयारी शुरू कर दी है।
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योजनाओं से वंचित रह रहे थे किसान
प्रबंध समिति भंग होने के बाद से किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है और न ही उन्हें योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है। अधिकारी अपनी मनमर्जी चला रहे है। किसानों को समिति की योजनाओं व सब्सिडी का समय पर लाभ नहीं मिल रहा था। कृष्णपाल सिंह, बागपत गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन
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दूर कराई जाती मिल की खामियां
प्रबंध समिति भंग होने के कारण मिलों में केवल अधिकारियों का हस्तक्षेप रहता है। किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। मिल प्रबंधन की ओर से रमाला मिल का संचालन करने का ठेका एक करोड़ 27 लाख रुपये में दिया गया है। प्रबंध समिति का गठन होने पर मिल का संचालन फेडरेशन की ओर से कराया जाता और कम खर्च में संचालन किया जाता। -रविंद्र मुखिया, रमाला सहकारी मिल के पूर्व उपसभापति