{"_id":"5e29e7a28ebc3e4b51755b03","slug":"earlier-prabhat-pheri-was-drawn-tricolor-was-made-with-hands-baraut-news-mrt4652935148","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले दिन निकाली जाती थी प्रभात फेरी, हाथों से बनाया जाता था तिरंगा झंडा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले दिन निकाली जाती थी प्रभात फेरी, हाथों से बनाया जाता था तिरंगा झंडा
विज्ञापन
पहले निकाली जाती थी प्रभात फेरी, हाथों से बनाया जाता था तिरंगा
बड़ौत (बागपत)। गणतंत्र दिवस के मात्र चार दिन शेष बचे हैं लेकिन अब लोगों मेें पहले जैसा इस त्योहार को लेकर उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि अब तो मात्र औपचारिकता रह गई है।
डॉ ओमवीर तोमर का कहना है कि भले हमें आजादी मिल गई है लेकिन लोग महंगाई, भ्रष्टाचार व बेरोजगारी की जंजीरों में जकड़े हुए है। अब तो गणतंत्र की महज खानापूर्ति हो रही है। मित्रमुनि का कहना है कि गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले प्रभात फेरी निकाली जाती थी। लोग ईमानदार थे और कानून का पालन करते थे। अब आजादी तो मिल गई लेकिन चारों ओर झूठ फरेब, कानून को ताक पर रखने वाले लोग हैं। बुजुर्ग महिला बूगली देवी का कहना है कि पहले होली व दीपावली की तरह गणतंत्र का उत्साह मनाया जाता था। तिरंगा झंडा हाथों से बनाया जाता था। अब तो झंडे भी रेडिमेड मिलने लगे हैं। फूलवती का कहना है कि गणतंत्र दिवस के एक सप्ताह पहले ही बच्चो की जुबान पर देशभक्ति के तराने सुनाई देने लगते थे। महिलाएं, युवतियों साथ बैठकर वीरों की गाथा सुनाती थी।
विज्ञापन
बड़ौत (बागपत)। गणतंत्र दिवस के मात्र चार दिन शेष बचे हैं लेकिन अब लोगों मेें पहले जैसा इस त्योहार को लेकर उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि अब तो मात्र औपचारिकता रह गई है।
डॉ ओमवीर तोमर का कहना है कि भले हमें आजादी मिल गई है लेकिन लोग महंगाई, भ्रष्टाचार व बेरोजगारी की जंजीरों में जकड़े हुए है। अब तो गणतंत्र की महज खानापूर्ति हो रही है। मित्रमुनि का कहना है कि गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले प्रभात फेरी निकाली जाती थी। लोग ईमानदार थे और कानून का पालन करते थे। अब आजादी तो मिल गई लेकिन चारों ओर झूठ फरेब, कानून को ताक पर रखने वाले लोग हैं। बुजुर्ग महिला बूगली देवी का कहना है कि पहले होली व दीपावली की तरह गणतंत्र का उत्साह मनाया जाता था। तिरंगा झंडा हाथों से बनाया जाता था। अब तो झंडे भी रेडिमेड मिलने लगे हैं। फूलवती का कहना है कि गणतंत्र दिवस के एक सप्ताह पहले ही बच्चो की जुबान पर देशभक्ति के तराने सुनाई देने लगते थे। महिलाएं, युवतियों साथ बैठकर वीरों की गाथा सुनाती थी।
विज्ञापन