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रुपये के दान को धर्म नहीं कहते : डॉ. श्रेयांश
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दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म को अंगीकार किया
बड़ौत। पंडित डॉ. श्रेयांश जैन ने कहा आज उत्तम त्याग धर्म का दिवस है, हमारे चैतन्य देव में अनंत धर्म होते हैं, लेकिन फिर भी हम पर्यूषण पर्व पर अपने आत्मदेव के दस धर्मों को मुख्य करके प्रतिदिन अपना आत्म अवलोकन करते हैैं।
वे रविवार को नगर में चल रहे दशलक्षण महा पर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस संसार के त्याग करने से जो आत्म शुद्धि की सम्यक पर्याय प्रगट होती है, उसे उत्तम त्याग धर्म कहते हैं, अक्सर लोग धन या पैसे के दान को ही त्याग धर्म धर्म समझ लेते हैं, लेकिन शास्त्रों में तो दान भी सिर्फ चार प्रकार का बताया है। इसमें औषधि दान, अभय दान, शास्त्र दान व आहार दान। कहा कि शास्त्रों में कही पर भी रुपये या धन के त्याग को दान नहीं कहा है। जिस तरह से बाड़ के पानी की गंदगी अगर हमारे घर के में घुस जाती है, उसी तरह से यह धन रुपी बाड़ की गंदगी हमारे चैतन्य घर में अगर आ गयी है, तो उसे दोनों हाथों से बाहर निकल देना चाहिए, तभी हमारा चैतन्य घर स्वच्छ और निर्मल रह सकता है।
उधर, रविवार को दशलक्षण महा पर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए मंदिरों व घरों में पूजा अर्चना की। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए सर्वप्रथम श्री जी का प्रकक्षालन व अभिषेक किया गया एवं तेरह द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई। साथ ही अर्घ्य चढ़ाए। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, आलोक जैन, मनोज जैन शामिल रहे।
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उधर पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में भी सादगी पूर्वक दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म को अंगीकार किया। इस दौरान दशलक्षण धर्म की पांच पूजा की गई। इसमें सतेंद्र जैन, अमन जैन, एस के जैन, इशित जैन, अमित जैन, आदिश जैन आदि रहे।
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बड़ौत। पंडित डॉ. श्रेयांश जैन ने कहा आज उत्तम त्याग धर्म का दिवस है, हमारे चैतन्य देव में अनंत धर्म होते हैं, लेकिन फिर भी हम पर्यूषण पर्व पर अपने आत्मदेव के दस धर्मों को मुख्य करके प्रतिदिन अपना आत्म अवलोकन करते हैैं।
वे रविवार को नगर में चल रहे दशलक्षण महा पर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस संसार के त्याग करने से जो आत्म शुद्धि की सम्यक पर्याय प्रगट होती है, उसे उत्तम त्याग धर्म कहते हैं, अक्सर लोग धन या पैसे के दान को ही त्याग धर्म धर्म समझ लेते हैं, लेकिन शास्त्रों में तो दान भी सिर्फ चार प्रकार का बताया है। इसमें औषधि दान, अभय दान, शास्त्र दान व आहार दान। कहा कि शास्त्रों में कही पर भी रुपये या धन के त्याग को दान नहीं कहा है। जिस तरह से बाड़ के पानी की गंदगी अगर हमारे घर के में घुस जाती है, उसी तरह से यह धन रुपी बाड़ की गंदगी हमारे चैतन्य घर में अगर आ गयी है, तो उसे दोनों हाथों से बाहर निकल देना चाहिए, तभी हमारा चैतन्य घर स्वच्छ और निर्मल रह सकता है।
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उधर, रविवार को दशलक्षण महा पर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए मंदिरों व घरों में पूजा अर्चना की। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में शासन की गाइड लाइन का पालन करते हुए सर्वप्रथम श्री जी का प्रकक्षालन व अभिषेक किया गया एवं तेरह द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई। साथ ही अर्घ्य चढ़ाए। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, आलोक जैन, मनोज जैन शामिल रहे।
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उधर पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में भी सादगी पूर्वक दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म को अंगीकार किया। इस दौरान दशलक्षण धर्म की पांच पूजा की गई। इसमें सतेंद्र जैन, अमन जैन, एस के जैन, इशित जैन, अमित जैन, आदिश जैन आदि रहे।