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दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
Updated Sun, 30 Oct 2016 12:25 AM IST
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worship
- फोटो : demo
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बागपत। दीपावली का पूजन इस बार बेहद शुभ रहेगा। वर्ष 1884 के बाद यह संयोग आया है। सौभाग्य, धाता और बुधादित्य योग का महासंगम बन रहा है। दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7.12 से शुरू होकर 8.50 तक रहेगी। इसके बाद स्वाती नक्षत्र का आगमन होगा, जो 9.05 मिनट से शुरू होगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस दीपावली पर सौभाग्य, धाता और बुधादित्य योग का महासंगम है। यह संयोग 1884 में पड़ा था और आगे 2145 में आएगा। इस दिन लक्ष्मी, गणेश, कुबैर और सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को स्थित लक्ष्मी की प्राप्ति होगी। इस बार पूजन स्वाती नक्षत्र में होगा। उन्होंने बताया कि बुध चंद्रमा साथ में होने के कारण राजकीय लोगों के लिए व्यापारी और सामान्य जन के लिए यह पर्व उत्तम रहेगा। प्रदोष काल में पूजा करना अति उत्तम रहेगा।
वृष लग्न जो कि स्थित लग्न है जो शाम 06.27 से शुरू होगा और रात 08.23 तक रहेगा। शाम 07.21 से रात 08.23 तक रहेगा। गृहस्थितयों के लिए अति उत्तम रहेगा। अमृत का चौथडिया शाम 07.12 से रात रात 08.12 तक है। ये समय स्थित लक्ष्मी की प्राप्ति कराएगा। उन्होंने बताया कि तीन जगह पर चौमुख दीपक जलाएं। इसके अलावा लक्ष्मी, गणेश के साथ कुबैर देवता का पूजन अवश्य करें। घी के दीपक जलाने से मानसिक शांति तो मिलती है इसके अलावा आर्थिक लाभ देता है। रात में सूक्त, गोपाल, सहस्त्रनाम, लक्ष्मी सूक्त और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। रात में जागरण भी शुभ होता है।
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पूजा करने की विधि
घर या कमरे के ईशान कोण में चौकी पर गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। चौकी पर लाल कपड़ा पर गणेश लक्ष्मी, कलश और कुबैर स्थापना करें। दीपक जलाकर सर्व प्रथम गणेश, लक्ष्मी जी के साथ सभी देवताओं के तिलक करें। फल, मिठाई, चावल चढ़ाए पूजा करें। दीपक को घर में मुख्य द्वार सहित विभिन्न स्थानों पर रखे।
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ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इस दीपावली पर सौभाग्य, धाता और बुधादित्य योग का महासंगम है। यह संयोग 1884 में पड़ा था और आगे 2145 में आएगा। इस दिन लक्ष्मी, गणेश, कुबैर और सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को स्थित लक्ष्मी की प्राप्ति होगी। इस बार पूजन स्वाती नक्षत्र में होगा। उन्होंने बताया कि बुध चंद्रमा साथ में होने के कारण राजकीय लोगों के लिए व्यापारी और सामान्य जन के लिए यह पर्व उत्तम रहेगा। प्रदोष काल में पूजा करना अति उत्तम रहेगा।
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वृष लग्न जो कि स्थित लग्न है जो शाम 06.27 से शुरू होगा और रात 08.23 तक रहेगा। शाम 07.21 से रात 08.23 तक रहेगा। गृहस्थितयों के लिए अति उत्तम रहेगा। अमृत का चौथडिया शाम 07.12 से रात रात 08.12 तक है। ये समय स्थित लक्ष्मी की प्राप्ति कराएगा। उन्होंने बताया कि तीन जगह पर चौमुख दीपक जलाएं। इसके अलावा लक्ष्मी, गणेश के साथ कुबैर देवता का पूजन अवश्य करें। घी के दीपक जलाने से मानसिक शांति तो मिलती है इसके अलावा आर्थिक लाभ देता है। रात में सूक्त, गोपाल, सहस्त्रनाम, लक्ष्मी सूक्त और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। रात में जागरण भी शुभ होता है।
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पूजा करने की विधि
घर या कमरे के ईशान कोण में चौकी पर गणेश लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। चौकी पर लाल कपड़ा पर गणेश लक्ष्मी, कलश और कुबैर स्थापना करें। दीपक जलाकर सर्व प्रथम गणेश, लक्ष्मी जी के साथ सभी देवताओं के तिलक करें। फल, मिठाई, चावल चढ़ाए पूजा करें। दीपक को घर में मुख्य द्वार सहित विभिन्न स्थानों पर रखे।