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पितृ अमावस्या पर आस्था की डुबकी, घरों में पूजा अर्चना
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। पितृ अमावस्या पर जिले भर में पूजा अर्चना की गई। यमुना नदी में हरियाणा और यूपी के श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। कोरोना संक्रमण के कारण लोगों ने घरों में पूजा अर्चना की।
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर बाबा जानकी दास मंदिर में पितरों को संतुष्ट करने की भावना को लेकर दिव्य पूजन किया गया। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या है। इस अमावस्या में पितरों की निमित्त जो भी कार्य किया जाता है, वह उत्तम फलदायी होता है। इसके बाद दिव्य यज्ञ किया गया। पितरों का विसर्जन सुख शांति से किया गया। यज्ञ में बबलू शर्मा सपत्नीक यजमान रहे। भूपेंद्र शर्मा, महेश शर्मा, राजेश गौतम, अमित शर्मा, सुबोध तिवारी, अशोक शर्मा, विश्वनाथ और शिवानी मौजूद रहे। उधर, यमुना में हरियाणा और यूपी के श्रद्धालुओं ने पहुंचकर डुबकी लगाई। किनारों पर पूजा अर्चना भी की गई।
कोरोना के कारण टूटी परंपरा
बागपत। अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए ब्राह्मणों को घर बुलाए जाने की परंपरा है। यही नहीं उन्हें भोजन कराएं और दक्षिणा दी जाती है। माना जाता है कि पितृ प्रसन्न होते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण ब्राह्मणों ने भी घर पहुंचने में रुचि नहीं दिखाई। अधिकतर लोगों ने घर पर ही दक्षिणा और भोजन को भिजवाया।
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बागपत। पितृ अमावस्या पर जिले भर में पूजा अर्चना की गई। यमुना नदी में हरियाणा और यूपी के श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। कोरोना संक्रमण के कारण लोगों ने घरों में पूजा अर्चना की।
पितृ विसर्जनी अमावस्या पर बाबा जानकी दास मंदिर में पितरों को संतुष्ट करने की भावना को लेकर दिव्य पूजन किया गया। ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या है। इस अमावस्या में पितरों की निमित्त जो भी कार्य किया जाता है, वह उत्तम फलदायी होता है। इसके बाद दिव्य यज्ञ किया गया। पितरों का विसर्जन सुख शांति से किया गया। यज्ञ में बबलू शर्मा सपत्नीक यजमान रहे। भूपेंद्र शर्मा, महेश शर्मा, राजेश गौतम, अमित शर्मा, सुबोध तिवारी, अशोक शर्मा, विश्वनाथ और शिवानी मौजूद रहे। उधर, यमुना में हरियाणा और यूपी के श्रद्धालुओं ने पहुंचकर डुबकी लगाई। किनारों पर पूजा अर्चना भी की गई।
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कोरोना के कारण टूटी परंपरा
बागपत। अमावस्या पर पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए ब्राह्मणों को घर बुलाए जाने की परंपरा है। यही नहीं उन्हें भोजन कराएं और दक्षिणा दी जाती है। माना जाता है कि पितृ प्रसन्न होते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के कारण ब्राह्मणों ने भी घर पहुंचने में रुचि नहीं दिखाई। अधिकतर लोगों ने घर पर ही दक्षिणा और भोजन को भिजवाया।
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