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कॉलेजों में फेल विद्यार्थियों को प्रवेश देने से इंकार
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कॉलेजों में फेल विद्यार्थियों को प्रवेश देने से इंकार
बागपत। बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों को कई स्कूलों ने दाखिला देने से इंकार करते हुए व्यक्तिगत पढ़ाई करने की सलाह दी। ऐसा करने वाले कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को लगता है कि फेल होने वाले विद्यार्थियों के कारण उनके विद्यालय का परीक्षा परिणाम खराब हो सकता है। इस तरह के नियमों के कारण विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यूपी बोर्ड से संबद्ध 142 हाईस्कूल और इंटर कॉलेज जिले में संचालित है। इनमें से इस साल 22 हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों का परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा। परीक्षा परिणाम 70 फीसदी से कम रहने वालो कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को डीआईओएस ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इसलिए स्कूलों में फेल होने वाले विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है और उनको व्यक्तिगत फार्म भरकर पढ़ाई करने के लिए कहा जा रहा है। जिससे विद्यार्थियों केे परेशान होना पड़ रहा है।
- बीमारी के कारण हुई फेल, दाखिला देने से मना किया
10वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान काफी दिन तक बीमार रही और बीमारी के कारण एक पेपर छूट गया था। परिणाम आने पर फेल हो गई। उसके बाद उसे श्री यमुना इंटर कॉलेज में दाखिला नहीं मिला और अब व्यक्तिगत पंजीकरण कराकर पढ़ाई करनी पड़ेगी। - आरोही बंसल, छात्रा
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- पहले फार्म दिया, फिर दाखिला नहीं दिया
10वीं कक्षा में तीन विषयों में फेल हो गया था। जिसके बाद दोबारा 10वीं कक्षा में पढ़ाई के लिए श्री यमुना इंटर कॅालेज की तरफ से फार्म दे दिया गया, लेकिन बाद में दाखिला देने से मना कर दिया। जिसकी अधिकारियों से शिकायत की। - रीतिक, छात्र।
अगर कोई विद्यार्थी अधिक विषयों में फेल है और उसके अंक भी काफी कम हैं तो उन्हें व्यक्तिगत पंजीकरण कराने के लिए कहा जा रहा है। अगर कोई विद्यार्थी दो विषयों में फेल है तो उनके अभिभावकों से बातचीत कर दाखिले दिए जा रहे हैं। - मुकेश राज कौशिक, प्रधानाचार्य श्री यमुना इंटर कालेज, बागपत।
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कॉलेज के परीक्षा परिणाम को बेहतर रखने की प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी है। अगर विद्यार्थियों को दाखिले में कोई परेशानी है तो उसकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। - रविंद्र सिंह, डीआईओएस।
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बागपत। बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले विद्यार्थियों को कई स्कूलों ने दाखिला देने से इंकार करते हुए व्यक्तिगत पढ़ाई करने की सलाह दी। ऐसा करने वाले कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को लगता है कि फेल होने वाले विद्यार्थियों के कारण उनके विद्यालय का परीक्षा परिणाम खराब हो सकता है। इस तरह के नियमों के कारण विद्यार्थियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यूपी बोर्ड से संबद्ध 142 हाईस्कूल और इंटर कॉलेज जिले में संचालित है। इनमें से इस साल 22 हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों का परीक्षा परिणाम निराशाजनक रहा। परीक्षा परिणाम 70 फीसदी से कम रहने वालो कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को डीआईओएस ने नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। इसलिए स्कूलों में फेल होने वाले विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है और उनको व्यक्तिगत फार्म भरकर पढ़ाई करने के लिए कहा जा रहा है। जिससे विद्यार्थियों केे परेशान होना पड़ रहा है।
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- बीमारी के कारण हुई फेल, दाखिला देने से मना किया
10वीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान काफी दिन तक बीमार रही और बीमारी के कारण एक पेपर छूट गया था। परिणाम आने पर फेल हो गई। उसके बाद उसे श्री यमुना इंटर कॉलेज में दाखिला नहीं मिला और अब व्यक्तिगत पंजीकरण कराकर पढ़ाई करनी पड़ेगी। - आरोही बंसल, छात्रा
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- पहले फार्म दिया, फिर दाखिला नहीं दिया
10वीं कक्षा में तीन विषयों में फेल हो गया था। जिसके बाद दोबारा 10वीं कक्षा में पढ़ाई के लिए श्री यमुना इंटर कॅालेज की तरफ से फार्म दे दिया गया, लेकिन बाद में दाखिला देने से मना कर दिया। जिसकी अधिकारियों से शिकायत की। - रीतिक, छात्र।
अगर कोई विद्यार्थी अधिक विषयों में फेल है और उसके अंक भी काफी कम हैं तो उन्हें व्यक्तिगत पंजीकरण कराने के लिए कहा जा रहा है। अगर कोई विद्यार्थी दो विषयों में फेल है तो उनके अभिभावकों से बातचीत कर दाखिले दिए जा रहे हैं। - मुकेश राज कौशिक, प्रधानाचार्य श्री यमुना इंटर कालेज, बागपत।
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कॉलेज के परीक्षा परिणाम को बेहतर रखने की प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी है। अगर विद्यार्थियों को दाखिले में कोई परेशानी है तो उसकी समस्या का समाधान कराया जाएगा। - रविंद्र सिंह, डीआईओएस।