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सिपाही की मौत: शव देखकर बोली बेटियां- पापा उठ जाओ, पत्नी हुई बेहोश, फूट-फूटकर रोई मां और बड़ा भाई

Thu, 22 May 2025 07:23 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, बागपत
अमर उजाला नेटवर्क, बागपत Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 22 May 2025 07:23 PM IST
सार

बुधवार रात आंधी में गिरे पेड़ से बाइक टकराने पर बागपत निवासी सिपाही पुष्पेंद्र की बिजनौर में मौत हो गई। उनका शव गांव पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। बड़े भाई इंद्रपाल ने मुखाग्नि दी।

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Death of a soldier: Seeing the dead body, the daughters said - Papa, get up, the wife fainted
सिपाही पुष्पेंद्र की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजनौर में बुधवार रात आंधी में गिरे पेड़ से बाइक टकराने पर सिपाही पुष्पेंद्र की मौत हो गई। उनका शव बृहस्पतिवार को पैतृक गांव बागपत के लुहारी में लाया गया, जहां पुष्पेंद्र की दोनों बेटियों अंजल (8) व ओपल (6) ने कहा कि पापा उठ जाओ। उनकी यह बात सुनकर वहां सभी की आंखें नम हो गईं। पुष्पेंद्र को सलामी देकर शव को अंतिम संस्कार किया गया। बड़े भाई इंद्रपाल ने मुखाग्नि दी।
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Death of a soldier: Seeing the dead body, the daughters said - Papa, get up, the wife fainted
लुहारी गांव में शव पहुंचने पर लगी भीड़ और विलाप करते परिजन। - फोटो : संवाद
लुहारी गांव के पुष्पेंद्र वर्ष 2011 में यूपी पुलिस में भर्ती हुए थे। पिछले डेढ़ साल से पुष्पेंद्र की ड्यूटी अफजलगढ़ थाने में चल रही थी। बुधवार रात ड्यूटी पर जाते समय पुष्पेंद्र की बाइक रास्ते में आंधी से टूटकर गिरे पेड़ से टकरा गई और उनकी मौत हो गई। पुष्पेंद्र की वर्ष 2013 में शादी हुई थी और परिवार में पत्नी नेहा के अलावा दो बेटी अंजल व ओपल हैं।
 
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पुष्पेंद्र का शव बृहस्पतिवार दोपहर को गांव में पहुंचा। घर पर आसपास के गांवों के लोग व रिश्तेदार भी पहुंचे हुए थे। पुष्पेंद्र के शव को देखकर पत्नी नेहा कई बार बेहोश हुई तो उसको किसी तरह अन्य महिलाओं ने संभाला। बुजुर्ग मां ब्रह्म कौर ने डेढ़ साल पहले पति जयभगवान को खोने का गम सहा था, तो अब जवान बेटे की मौत होने पर वह रोती रही।
 
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काफी मन्नतों के बाद हुआ था पुष्पेंद्र का जन्म
मृतक पुष्पेंद्र के एक बड़े भाई इंद्रपाल (56) हैं, जो गांव में रहकर खेती करते हैं। इंद्रपाल के जन्म के लगभग 21 साल बाद बड़ी मन्नतों से पुष्पेंद्र हुआ था। इंद्रपाल ने बताया कि उसने पुष्पेंद्र को अपनी गोद में खिलाया है। जिस भाई को गोद में खिलाया, उसका ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
 

पिता की मौत से पुष्पेंद्र के कंधों पर थी परिवार की जिम्मेदारी 
बड़ा भाई इंद्रपाल खेती करके थोड़ा घर खर्च निकालता है। मगर पिता की मौत के बाद पुष्पेंद्र के कंधे पर ही परिवार की जिम्मेदारी थी। अब पुष्पेंद्र की मौत के बाद परिवार पूरी तरह से टूट गया है।

 
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