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सोच बदली तो आसमान छूने लगी बेटियां

Sat, 26 Sep 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2020 11:54 PM IST
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Daughters changed when thinking changed
डार्ट्स डे
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- जिले में लगातार सुधर रही लिंगानुपात की स्थिति
- कोरोना काल में बेटियों के जन्म में हुई बढ़ोत्तरी
- बेटियों को पढ़ाया जा रहा, बढ़ी साक्षरता दर भी
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलते ही नतीजे भी बदलने लगे हैं। पिछले नौ साल के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं की साक्षरता दर में छह प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों में जिले में बेटियों की साक्षरता दल 60 फीसदी थी, अब यह संख्या 66 प्रतिशत पर पहुंच गई है। शिक्षा को बढ़ावा मिला तो पिछले दो साल में यूपी बोर्ड की टॉपर बेटियां बागपत ने दी। यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा में हिलवाड़ी गांव की रिया जैन ने सूबे में पहला स्थान पाया। पिछले साल 12वीं में फतेहपुर पुट्ठी की तनु चौधरी ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया था। बेटियों को लेकर समाज की सोच बदली है। लिंगानुपात में लगातार सुधार हुआ है। 31 मार्च 2020 तक जिले में एक हजार पुरुषों पर 892 महिलाएं थी। खुशखबरी यह है कि अब यह संख्या बढ़कर 912 हो गई है। सीएमओ डॉ आरके टंडन कहते हैं कि कोरोना काल में बेटियों के जन्म में 12 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। नतीजे सुखद हैं।
एक नजर में आंकडे़ :
- यूपी बोर्ड हाईस्कूल में जिले का रिजल्ट 84.30 प्रतिशत रहा। दसवीं की टॉप टेन मेरिट में आठ छात्राओं और सात छात्र शामिल रहे।
- यूपी बोर्ड इंटर का परीक्षाफल 80.76 रहा। जिले की टॉपर लिस्ट में 13 छात्राएं और तीन छात्र शामिल रहे। बेटियों का दबदबा कायम।
- हिलवाड़ी गांव की बेटी रिया जैन ने यूपी बोर्ड की दसवीं कक्षा में प्रदेश में पहला स्थान पाकर शिक्षा के क्षेत्र में नाम रोशन किया।
- राजकीय हाईस्कूल मवी कलां की शिक्षिका भावना ने कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाने के लिए अच्छा प्रयास किया। उनकी वीडियो का बोर्ड ने चयन किया और दूरदर्शन पर प्रसारण हुआ।
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- दोघट के किसान किरणपाल के घर में छह बेटियां हैं। किसान ने बेटियों को शिक्षित करने पर जोर दिया। सीमा और रूबी यूपी पुलिस में हैं। गुड्डी राष्ट्रीय पहलवान हैं। सुधा एसआई हैं। आयुषी और रूपल शिक्षा हासिल कर रही हैं।
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किसने क्या कहा
- जेवी कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ अलका रानी कहती हैं कि बेटियों ने मेहनत शुरू की तो सफलता मिलनी शुरू हुई। सफलता से समाज की सोच बदलनी शुरू हो गई है। भविष्य के लिए यह बेहद अच्छे संकेत हैं। समाज को मिलकर इस मुहिम को और अधिक आगे ले जाना चाहिए।
- खेकड़ा में तैनात महिला चिकित्सक डॉ सोनल धामा का कहना है कि सामाजिक जागरूकता से बेटियों को लेकर सोच बदल रही है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीति धीरे-धीरे खत्म हो रही है। शहर से लेकर देहात तक बेटियों को पढ़ाया जा रहा है।

आईपीएस बिटिया आंचल चौहान
बागपत। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में पाली गांव निवासी और वर्तमान में चौहान एंक्लेव में रह रहे अजय चौहान की बेटी आंचल का चयन आईपीएस के लिए हुआ है। जिले के लिए यह गौरव की बात है। आंचल कहती है कि बिना परिवार के सपोर्ट के कामयाबी नहीं मिल सकती थी।
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