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कत्ल के बाद भी चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां

Mon, 26 Dec 2016 01:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली
ब्यूरो/अमर उजाला, बिनौली Updated Mon, 26 Dec 2016 01:22 AM IST
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Hectic rounds fired after decapitation
धनौरा सिल्वरनगर में देवी सिंह की हत्या के बाद विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
किसान देवी सिंह पर पहले भी दो बार हमले हो चुके थे। आरोपियों ने तीसरी बार हमला कर देवी सिंह को मौत के घाट उतार दिया। किसान को हमले का अंदेशा था, इसी कारण उसने अपने तीनों बेटों का गांव से बाहर भेज रखा है। पुलिस तक खबर पहुंची है कि आरोपियों ने देवी सिंह की हत्या कर मौके पर जश्न मनाया, यही नहीं काफी देर तक हवाई फायरिंग भी की।
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परिजनों के मुताबिक दूध व्यापारी सुमित की 14 मई 2015 को हुई हत्या का मुकदमा उसके भाई देवी सिंह ने बिनौली थाने में दर्ज कराया था। इस वारदात के कुछ समय बाद ही हत्यारोपी उस पर केस में समझौते का दबाव बनाने लगे थे, लेकिन देवी सिंह इसके लिए तैयार नहीं हुए थे। 20 सितंबर 2015 को आरोपियों ने उसके घर में घुसकर हमला किया। वह घायल हो गया था। इस संबंध में थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई।
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इसके बाद भी वह समझौते को तैयार नहीं हुआ। आरोपियों ने नौ जनवरी 2016 को फिर जानलेवा हमला किया। बिनौली थाने में फिर 307 की धारा में रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस अफसरों ने उनकी जान को खतरा मानते हुए पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करा दी थी। रविवार को पुलिस सुरक्षा में ही हत्या की। शव के पास ही आरोपियों ने जश्न किया। बाद में फायरिंग कर गए। रास्ते में गन्ना क्रय केंद्र के पास कई किसान गोली लगने से बाल-बाल बचे, क्योंकि वह गोली की आवाज सुनकर खेत की ओर जा रहे थे। 
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सोहनवीर से चल रही है रंजिश 
 पुलिस के मुताबिक देवी सिंह के परिवार की गांव से ही सोहनवीर से काफी समय से रंजिश चल रही है। इस रंजिश में देवी सिंह के भाई सुमित की हत्या हुई थी। उस केस में सुनील, बिट्टू, दो महिला (मुन्नी और सीमा) जेल गई थी। 

60 राउंड फायर किए  :  देवी सिंह के हत्यारोपियों ने राइफल, पिस्टल समेत अन्य आधुनिक हथियारों से 60 राउंड फायर किए।  
दो माह पहले हट गया था एक सुरक्षा कर्मी : परिजनों के अनुसार देवी सिंह की सुरक्षा में लगे दो कांस्टेबलों में से एक को दो माह पहले हटाया। उनको अपनी जान का खतरा सता रहा था। वे पुलिस अफसरों से सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे थे, लेकिन पुलिस अफसरों ने गुहार को गंभीरता से नहीं लिया। 

सुरक्षा का वक्त आया तो एसएलआर में फंसी गोली
बिनौली। देवी सिंह की सुरक्षा में लगे सिपाही अनुज ने बताया हमलावरों को देखते ही किसान ने  कहा ये मुझे मारने के लिए आए हैं। यह सुनते ही उसने गोलियां चलानी शुरू कर दी। जब तक उसने गोली चलाई, तब तक हमलावर काफी दूर रहे।

इसी दौरान उसकी एसएलआर में गोली फंस गई और एसएलआर चलनी बंद हो गई। उस समय हमलावर उन पर फायरिंग करते हुए आए। वह अपनी जान बचाने के लिए भागा। देवी सिंह भी खेत की तरफ भागा, इसी बीच आरोपियों ने देवी सिंह को कई गोली मार दी। 

किस काम की पुलिस चेकिंग 
बिनौली। पुलिस चेकिंग पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जघन्य वारदात के बाद हमलावर कार और बाइक पर सवार होकर भाग गए। पुलिस को सही समय पर सूचना भी मिली। यही नहीं पुलिस को यह भी पता था हमलावर किस तरफ गए हैं, इसके बाद भी बदमाशों का सुराग नहीं लगा। न कोई वाहन चेकिंग में पकड़ा और न ही कहीं से असलाह बरामद हुआ। आखिर पुलिस ने कांबिंग किन रास्तों पर की। पुलिस क्यों फरार हमलावरों को नहीं पकड़ सकी।

यह कोई पहला मामला नहीं है। गांगनौली काड में पांच लोगों की हत्या कर दो हमलावर पैदल ही जंगल के रास्ते फरार हुए। घटनास्थल से कुछ दूर जाकर एसएलआर मिट्टी में दबाई, ग्रामीणों ने पुलिस को बताया हमलावर इस तरफ गए हैं, लेकिन दोनों बदमाश मौके से ही नहीं बल्कि यूपी से बाहर चैन से हरियाणा तक पहुंच गए। यहां सवाल पुलिस की चेकिंग व्यवस्था पर उठता है। लोकेशन मिलने के बाद भी बदमाशों को नहीं पकड़ा जाता और हमलावर बेखौफ पुलिस की आंखों से ओझल हो जाते हैं।

मौके से उठाकर बड़ावद चौकी पर ले गए लाश
बिनौली। देवी सिंह की हत्या के बाद एकाएक पुलिस को भी कुछ नहीं सूझा। सुरक्षा में लगे सिपाही ने जैसे ही वारदात की जानकारी दी। थाना पुलिस की जीप मौके की तरफ दौड़ी। करीब आधा घंटे बाद जिस वक्त पुलिस मौके पर पहुंची, यहां लोगों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई थी।

उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। पुलिस को अंदेशा था नाराज ग्रामीण हंगामा कर सकते हैं। एकाएक सिपाहियों ने जीप में ही देवी सिंह के शव को उठाकर डाला और लेकर चल दिए। ग्रामीण पूछते ही रह गए कि इतनी जल्दी क्यों कर रहे हैं। पुलिस ने मौके से शव को हटाकर पहले बड़ावद पुलिस चौकी में रखा।  


इसके बाद शव को पोस्टमार्टम हाउस पर लेकर गए। परिजन मौके पर काफी देर से पहुंचे। पुलिस की जीप में रखे शव के दोनों पैर बाहर की तरफ निकले थे। लोगों ने कहा पुलिस की लापरवाही है। आमतौर पर हत्या या हादसे के बाद पुलिस शवों को अपनी जीप में ले जाने के बजाए प्राइवेट वाहन का इस्तेमाल करती है, लेकिन यहां पुलिस जीप में ही शव को ले जाया गया।
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