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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Baghpat News ›   Consolidation officer trapped in rigging

हेराफेरी में फंसे चकबंदी अधिकारी

Fri, 12 Jan 2018 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत Updated Fri, 12 Jan 2018 12:16 AM IST
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जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वाले चकबंदी अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है। 17 साल के रिकॉर्ड की जांच में कईं अनियमितताएं सामने आने के बाद जिले में तैनात रहे छह चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस मामले में प्रमुख सचिव की ओर से अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
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जिले के बामनौली, बरनावा, निरपुड़ा और रंछाड़ मेें वर्ष 1981 से चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। इसे लेकर लगातार शिकायतें जारी रहीं और विवाद होते रहे। बामनौली गांव की चकबंदी प्रक्रिया से आहत किसान कृष्णपाल ने पांच दिसंबर 2017 को आत्महत्या कर ली थी।
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बामनौली के पूर्व प्रधान महीपाल सिंह समेत अन्य किसानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा मेरठ कमिश्नर डॉ प्रभात कुमार से गड़बड़ी की शिकायत की थी। शिकायत के बाद चकबंदी निदेशालय, मंडलायुक्त कार्यालय और जिले के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कराकर जांच कराई गई। वर्ष 2001 से मार्च 2017 तक कराई गई चकबंदी की जांच हुई तो राजस्व रिकार्ड और चकबंदी प्रक्रिया में हेराफेरी सामने आई है।
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जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव रजनीश दूबे ने बागपत में तैनात रहे तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सोहनलाल, तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी अशोक कुमार के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति भेजी गई है।

तत्कालीन चकबंदी अधिकारी और वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात लाल बहादुर के खिलाफ राजस्व विभाग को पत्र लिखा गया है। इसके अलावा तत्कालीन चकबंदीकर्ता रामरतन प्रजापति, तत्कालीन चकबंदी अधिकारी मंजू लता और चकबंदी अधिकारी राजेश कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश प्रमुख सचिव ने दिए हैं।  बामनौली गांव के पूर्व ग्राम प्रधान महीपाल ने बताया कि किसान हित के लिए लंबे समय से संघर्ष चल रहा है।


36 साल चली चकबंदी, टूट गए किसान 
बागपत। पूर्व प्रधान महिपाल सिंह ने बताया कि बामनौली गांव में 1981 से चकबंदी प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद फिर 1989 में चक काटे गए, वह भी गलत तरीके से काटे गए थे। उसके बाद 1991 में चक काटे गए और धारा 20 लगा दी गई। उस समय न्यायालय के आदेश पर विजिलेंस की टीम ने इसकी जांच की तो खामियां पाई गई। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2016 में चकबंदी अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेजों से सारा खेल किया।   ब्यूरो
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