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मनीष ने सुनाई हमले की दर्द भरी दास्तां
Updated Tue, 08 May 2018 01:00 AM IST
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अमीनगर सराय (बागपत)। किशोर मनीष ने अपने और आकाश के ऊपर हुए हमले की पूरी कहानी बयान की। पुलिस को भी वह बयान दर्ज करा चुका है। मनीष का कहना है कि उन्हें सराय मोड़ से उठाकर करीब 10 युवक ले गए । उसे और आकाश को बेरहमी से पीटा। किसी तरह से उसे छोड़ दिया । लकड़ी के फट्टो, बेल्ट, लाठी डंडों और तमंचों से पिटाई की । उनसे बार-बार लड़की के विषय में ही पूछा जा रहा था, जबकि उन्हें जानकारी नहीं थी। उसे छोड़ दिया, लेकिन बाद में आकाश की अधिक पिटाई की, इससे उसकी मौत हो गई।
सहमी दलित बस्ती, इधर-उधर भेजे युवा
अमीनगर सराय। आकाश पर हमले के बाद से ही दलित बस्ती में सन्नाटा है। अधिकतर परिवारों ने अपने परिवार के लड़कों को इधर-उधर भेजा। आकाश की मौत के बाद से एक बार फिर गम पसरा है। कोई कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। कुछ लोग पलायन भी कर सकते हैं। उधर, जिस युवक के साथ युवती गई थी, उसका परिवार पहले से ही गांव में नहीं है।
कहां गया जनप्रतिनिधियों का दलित प्रेम
अमीनगर सराय (बागपत)। दलित युवक पर हमला हुआ और उसकी जान चली गई। कई दिन तक वह जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, लेकिन उसकी मौत के बावजूद किसी भी राजनीतिक दल के नेता कमाला गांव में नहीं पहुंचे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश वाल्मीकि के अलावा अन्य कोई जनप्रतिनिधि गांव नहीं पहुंचा।
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रुपये होते तो बच जाती आकाश की जान
अमीनगर सराय (बागपत)। पीड़ित परिवार की महिलाओं ने कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनके पास अगर रुपये होते तो वह किसी बड़े अस्पताल में आकाश का इलाज करा लेते और उसकी जान बच जाती, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते ही आकाश की मौत हुई है।
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सहमी दलित बस्ती, इधर-उधर भेजे युवा
अमीनगर सराय। आकाश पर हमले के बाद से ही दलित बस्ती में सन्नाटा है। अधिकतर परिवारों ने अपने परिवार के लड़कों को इधर-उधर भेजा। आकाश की मौत के बाद से एक बार फिर गम पसरा है। कोई कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। कुछ लोग पलायन भी कर सकते हैं। उधर, जिस युवक के साथ युवती गई थी, उसका परिवार पहले से ही गांव में नहीं है।
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कहां गया जनप्रतिनिधियों का दलित प्रेम
अमीनगर सराय (बागपत)। दलित युवक पर हमला हुआ और उसकी जान चली गई। कई दिन तक वह जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा, लेकिन उसकी मौत के बावजूद किसी भी राजनीतिक दल के नेता कमाला गांव में नहीं पहुंचे। पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश वाल्मीकि के अलावा अन्य कोई जनप्रतिनिधि गांव नहीं पहुंचा।
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रुपये होते तो बच जाती आकाश की जान
अमीनगर सराय (बागपत)। पीड़ित परिवार की महिलाओं ने कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उनके पास अगर रुपये होते तो वह किसी बड़े अस्पताल में आकाश का इलाज करा लेते और उसकी जान बच जाती, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते ही आकाश की मौत हुई है।